BILASPUR NEWS. शेयर ट्रेडिंग के नाम पर लाखों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद आरोपी सिद्धार्थ एक्का को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने आरोपी की आईवीएफ प्रक्रिया से गर्भवती पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसे छह सप्ताह की सशर्त अंतरिम जमानत प्रदान की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि पूरी होने पर आरोपी को संबंधित न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।

शेयर ट्रेडिंग में 20 लाख की ठगी का आरोप
प्रकरण के अनुसार, शिकायतकर्ता रवि मोहन गोस्वामी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वर्ष 2024 के दौरान उन्हें विभिन्न मोबाइल नंबरों से संपर्क कर शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफा कमाने का लालच दिया गया। आरोपियों ने उन्हें ‘मनी ट्रेड 365’ और ‘स्काई ट्रेड’ जैसे मोबाइल एप डाउनलोड करवाए तथा क्यूआर कोड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से करीब 20 लाख रुपये की राशि निवेश के नाम पर ट्रांसफर करा ली।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने सिद्धार्थ एक्का के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आईटी एक्ट तथा अनियमित जमा योजनाओं से जुड़े प्रावधानों के तहत अपराध दर्ज कर 1 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था। तब से वह न्यायिक हिरासत में था।

पत्नी की देखभाल के लिए मांगी थी राहत
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता निखिल मेहता ने अदालत को बताया कि आरोपी की पत्नी आईवीएफ प्रक्रिया के जरिए गर्भवती हैं और उनका नियमित उपचार चल रहा है। उन्हें प्रतिदिन विशेष इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं तथा परिवार में उनकी देखभाल करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है। ऐसे में पत्नी को शारीरिक और मानसिक सहयोग देने के लिए पति की उपस्थिति आवश्यक है।
बचाव पक्ष ने तीन माह की अंतरिम जमानत की मांग की थी, हालांकि अदालत ने छह सप्ताह की राहत मंजूर की।

दस्तावेज सत्यापन में ढिलाई पर कोर्ट नाराज
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के रवैये पर असंतोष जताया। अदालत ने कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद आईवीएफ गर्भावस्था से संबंधित दस्तावेजों का समुचित सत्यापन नहीं कराया गया और न ही कोई स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि जब राज्य की ओर से आवश्यक सत्यापन का प्रयास ही नहीं किया गया, तब याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को सही मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। अदालत ने महाधिवक्ता को भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के निर्देश भी दिए।

इन शर्तों पर मिली राहत
-आरोपी को छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई।
-समान राशि के दो जमानतदारों के साथ व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करना होगा।
-जमानत अवधि समाप्त होने पर संबंधित न्यायालय में आत्मसमर्पण अनिवार्य होगा।
-आत्मसमर्पण के बाद आवश्यक दस्तावेज और शपथपत्र हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने होंगे।

अवकाश के कारण टली थी सुनवाई
मामले की सुनवाई पहले 28 मई को प्रस्तावित थी, लेकिन अवकाश के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। इसके बाद प्रकरण को 1 जून को पुनः सूचीबद्ध किया गया, जहां कोर्ट ने अंतरिम जमानत पर फैसला सुनाया।


































