NEW DELHI NEWS. भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान अदालत ने मीडिया कवरेज और सार्वजनिक बयानों पर कड़ी नाराजगी जताई। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कहा कि न्यायपालिका पर आरोप लगाना और यह कहना कि आरोपी पक्ष को संरक्षण दिया जा रहा है, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सीजेआई ने सुनवाई के दौरान कहा कि कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिन्हें सुनकर अदालत बेहद दुखी है। उन्होंने मीडिया से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि किसी एक पक्ष के बयान के आधार पर निष्कर्ष पेश नहीं किए जाने चाहिए।

मामले की सुनवाई कर रही बेंच में जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचौली भी शामिल रहे। कोर्ट ने कहा कि उसे पूरा भरोसा है कि पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष दोनों जांच में सहयोग करेंगे और जांच एजेंसियां सच्चाई तक पहुंचेंगी। अदालत ने कहा कि यह धारणा बनाई जा रही है कि न्यायपालिका निष्पक्ष ट्रायल नहीं होने दे रही, जबकि ऐसा नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना एजेंसियों का काम है और अदालत को उनकी प्रक्रिया पर भरोसा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि 12 मई को 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स में पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए, क्योंकि मृतका के पति पेशे से वकील हैं और उनकी सास रिटायर्ड जिला जज रह चुकी हैं। कोर्ट ने कहा कि इसी वजह से उसने मामले का संज्ञान लिया। इस दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप करते हुए दोबारा पोस्टमार्टम की मांग पर कार्रवाई की। अदालत को बताया गया कि दिल्ली AIIMS के डॉक्टर भोपाल जाकर पोस्टमार्टम कर चुके हैं और अब अंतिम संस्कार भी हो चुका है।

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि CBI जांच जल्द शुरू होगी। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने से किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकार प्रभावित न हों। इस पर CJI ने कहा, “बिल्कुल नहीं।”

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से कहा कि वे मीडिया में बयानबाजी करने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसियों के सामने रखें, ताकि जांच प्रभावित न हो। अदालत ने मीडिया से भी संभावित गवाहों और आरोपियों के अनावश्यक इंटरव्यू लेने से बचने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि CBI एक उच्चस्तरीय जांच एजेंसी है और उसे भरोसा है कि एजेंसी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगी।



































