RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी मर्डर केस में अमित जोगी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को एक साथ टैग करते हुए 23 अप्रैल को संयुक्त सुनवाई की तारीख तय की है। अमित जोगी ने उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें CBI को अपील करने की अनुमति दी गई थी, साथ ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

गौरतलब है कि 6 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश भी दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है।

अमित जोगी ने बताया कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal, Mukul Rohatgi, Vivek Tankha, Siddharth Dave और Shashank Garg ने पैरवी की। बता दें कि यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से दो सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अन्य को सजा सुनाई गई थी। उस समय ट्रायल कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।

मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने बरी किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। बाद में मामला हाईकोर्ट भेजा गया, जहां हालिया फैसले में अमित जोगी को दोषी ठहराया गया। उन्होंने कहा था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी। जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है।

इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं। अब 23 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई होगी। इस सुनवाई में यह तय होगा कि हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहेगा या इसमें कोई बदलाव किया जाएगा।





































