Rajasthan News::जयपुर। राजस्थान में अक्षय तृतीया (आखा तीज) को खुशियों और ‘अबूझ सावे’ का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार इस शुभ दिन पर बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन का पहरा बेहद सख्त रहेगा।

अक्षय तृतीया रविवार, 19 अप्रैल 2026 को है। गृह विभाग ने बाल विवाह रोकने के लिए व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है। शादी कराने वाले पंडित से लेकर खाना बनाने वाले हलवाई तक, कोई भी छोटी सी चूक हुई तो सीधे कानूनी कार्रवाई और जेल हो सकती है।

हलवाइयों-बैंड वालों से शपथ पत्र, शादी कार्ड पर उम्र अनिवार्य
प्रशासन ने इस बार केवल निगरानी नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का नया फॉर्मूला अपनाया है। शादी के निमंत्रण पत्र (कार्ड) पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि व उम्र का उल्लेख करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। हलवाई, बैंड वाले, पंडित, टेंट हाउस संचालक और ट्रांसपोर्टर्स से लिखित शपथ पत्र लिए जा रहे हैं। यदि किसी ने बाल विवाह में अपनी सेवाएं दीं तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।

कलेक्टर और एसपी होंगे सीधे जवाबदेह
सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी जिले में बाल विवाह होने पर वहां के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) सीधे जवाबदेह होंगे। सभी जिलों में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए गए हैं। पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और स्थानीय पुलिस की टीमें लगातार निगरानी रखेंगी।संदिग्ध बाल विवाह की सूचना पर आमजन 1098, 181 या 100 नंबर पर शिकायत कर सकते हैं। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।

क्यों है अक्षय तृतीया सबसे बड़ी चुनौती?
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में अक्षय तृतीया को ‘अबूझ सावा’ माना जाता है, जिसमें मुहूर्त निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती। आर्थिक तंगी और अशिक्षा के कारण कई परिवार इसी दिन एक ही पंडाल में कई बच्चों की शादियां कर देते हैं, ताकि खर्च भी कम हो और मुहूर्त भी न निकलवाना पड़े। पीपल पूर्णिमा पर भी इसी तरह का खतरा रहता है।




































