DURG NEWS. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई करते हुए अमर बिल्डर (अमर इंफ्रा) के संचालक चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई महेश कॉलोनी स्थित उनके निवास और दफ्तर दोनों जगह एक साथ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक ईडी की टीम सुबह करीब 6 बजे दो वाहनों में पहुंची और परिसर को घेरकर जांच शुरू की। अधिकारी दस्तावेजों, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। फिलहाल ईडी की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

सूत्रों के अनुसार अमर इंफ्रा ग्रुप के तहत 6 से अधिक फर्म संचालित हैं। जांच एजेंसियां इन फर्मों के वित्तीय लेन-देन, निवेश और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। चतुर्भुज राठी स्थानीय स्तर पर भाजपा से जुड़े सक्रिय नेता भी बताए जा रहे हैं, जिससे इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। ईडी की यह कार्रवाई भारतमाला प्रोजेक्ट में हुए कथित मुआवजा घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है।

शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि प्रोजेक्ट से प्रभावित क्षेत्रों में कई प्रभावशाली लोगों ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर जमीन खरीदी और बाद में उसी जमीन का मुआवजा लिया गया। इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के कुछ नेताओं के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। 27 अप्रैल को भी ईडी ने ऐसे ही जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से मिले दस्तावेजों में कथित तौर पर राजनीतिक कड़ियों के संकेत मिले हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि राजस्व अधिकारियों—पटवारी और आरआई—ने मुआवजे के प्रकरण तैयार कर कलेक्टर कार्यालय भेजे, जिन पर अनुमोदन के बाद भुगतान जारी किया गया। करीब 12 जिलों के तत्कालीन कलेक्टरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इनमें से 6 अधिकारियों पर कमीशन लेने के आरोप की जांच की जा रही है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, धमतरी और कोरबा समेत कई जिलों के नाम सामने आए हैं।

आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की है। जांच के दौरान तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पटवारी, राजस्व निरीक्षक, प्रॉपर्टी डीलर और कुछ किसान भी शामिल हैं।






































