NEW DELHI NEWS. भारत की 7.8% आर्थिक विकास दर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों की मेहनत, इच्छाशक्ति और सामूहिक ताकत का परिणाम बताया है। आज यानी 1 सितंबर को सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने देश को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। साथ ही प्रधानमंत्री ने एक बार फिर लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि अगर सोने की जरूरत नहीं है तो उसे खरीदने से बचना चाहिए। इससे पहले भी 11 मई को प्रधानमंत्री ने लोगों से सोने की खरीदारी कम करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के भीतर कुछ लोग निराशा फैलाने और झूठ के सहारे माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने 7.8% की विकास दर हासिल की है।

पीएम मोदी ने कहा कि देश को इसी रफ्तार को बनाए रखना होगा और विकास की गति को आगे और तेज करना होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ने पर जोर दिया। उनका कहना है कि जितना ज्यादा भारत स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर देगा, देश उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपा जाएगा। प्रधानमंत्री की अपील को भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का करीब 99% सोना विदेशों से आयात करता है।

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत का सोना आयात बिल करीब ₹6.4 लाख करोड़ रहा। विदेशों से खरीदे जाने वाले सामान के कुल खर्च में करीब 9% हिस्सेदारी के साथ सोना प्रमुख आयातित वस्तुओं में शामिल रहा। 2025-26 में भारत ने पिछले कारोबारी साल की तुलना में करीब 4.76% कम सोना खरीदा, लेकिन इसके बावजूद सोने के आयात बिल में करीब 24% की बढ़ोतरी हुई। इसकी प्रमुख वजह सोने की कीमतों में तेजी रही। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत करीब 76 हजार डॉलर प्रति किलो से बढ़कर 1 लाख डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गई। फिलहाल कीमत करीब 1.52 लाख डॉलर प्रति किलो बताई गई है।

महंगी कीमतों का असर आयात पर भी दिखाई दे रहा है। कीमतें बढ़ने के कारण आयातकों की खरीदारी में कमी आई है। सोने की खरीदारी के आंकड़ों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। जनवरी में करीब 100 टन, फरवरी में लगभग 65 टन और मार्च में करीब 22 टन सोना खरीदा गया। अप्रैल में यह आंकड़ा करीब 15 टन रहने का अनुमान जताया गया है। यह मात्रा पिछले तीन दशकों के सबसे निचले स्तरों में शामिल बताई जा रही है। घरेलू बाजार में सोने की कीमत ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम से ज्यादा बताई गई है। इसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हवाले से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की पहली तिमाही में भारत में निवेश के लिए सोने की मांग आभूषणों की मांग से भी अधिक रही।

PM की अपील के पीछे डॉलर और रुपये का कनेक्शन
सोने का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदने के कारण इसके आयात के लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। ऐसे में सोने की गैर-जरूरी खरीदारी घटने से आयात बिल कम हो सकता है। इसका संभावित असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ सकता है और डॉलर की मांग का दबाव कम होने से रुपये को कमजोर होने से बचाने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री लगातार कम गैर-जरूरी आयात, स्वदेशी उत्पादों और आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहे हैं।





































