BILASPUR NEWS. खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और ‘मिस ब्रांडिंग’ के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिलासपुर के प्रसिद्ध ‘महेश स्वीट्स’ के संचालक महेश चौकसे की अपील को खारिज करते हुए उन पर लगाए गए 1 लाख रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि खाद्य सामग्री की शुद्धता सुनिश्चित करना केवल निर्माता ही नहीं, बल्कि उसका उपयोग और भंडारण करने वाले होटल संचालक की भी जिम्मेदारी है।

यह मामला करीब 13 साल पुराना है। 15 अक्टूबर 2011 को खाद्य विभाग की टीम ने शहर के तारबाहर चौक स्थित महेश स्वीट्स की निर्माण इकाई पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान वहां से ‘अरारोट’ के सैंपल लिए गए थे। जब रायपुर की लैब में इन नमूनों की जांच हुई, तो खुलासा हुआ कि जिसे ‘अरारोट’ बताकर स्टोर किया गया था, वह वास्तव में मक्का स्टार्च (Corn Starch) था। प्रशासन ने इसे ‘मिस ब्रांडिंग’ का स्पष्ट मामला मानते हुए संचालक पर जुर्माना ठोक दिया था।

संचालक की दलीलें हुईं खारिज
निचली अदालत और सत्र न्यायालय (2019) से अपील खारिज होने के बाद संचालक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। संचालक की मुख्य दलीलें थीं वे केवल सामग्री के उपयोगकर्ता हैं, निर्माता नहीं। सैंपल की जांच रायपुर के बजाय गाजियाबाद की लैब में होनी चाहिए थी।

हाईकोर्ट का कड़ा फैसला:
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु दत्त गुरु की डिवीजन बेंच ने इन दलीलों को सिरे से नकार दिया। कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 26(2) का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति खाद्य सामग्री रखता है, मानकों का पालन करना उसकी जवाबदेही है। साथ ही कोर्ट ने रायपुर लैब की रिपोर्ट को पूरी तरह वैध माना।

धारा 52 के तहत लगाया गया था 1 लाख का जुर्माना। नाम बदलकर (अरारोट की जगह मक्का स्टार्च) सामग्री का उपयोग करना कानूनन अपराध है। होटल संचालक अपनी जिम्मेदारी से यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि वह केवल उपयोग करने वाला है।




































