AMBIKAPUR. चंद्रयान-3 की सफलता के पीछे छत्तीसगढ़ के कई युवाओं का भी नाम है। दरअसल, चंद्रयान-3 अभियान में इसरो के वैज्ञानिकों के साथ अम्बिकापुर का एक बेटा भी शामिल रहा है। चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल लैंडिग में भारत के वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत शामिल है। इसमें अंबिकापुर के निशांत सिंह के साथ इसरो के वैज्ञानिकों की टीम ने ही चंद्रयान-3 में एक उपकरण लगाया है, जो चांद पर मिट्टी सहित अन्य तत्वों का अध्ययन करेगा। निशांत के साथ टीम ने अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्टरोमीटर चंद्रयान-3 में स्थापित किया है। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से निशांत के परिजनों समेत समूचा सरगुजा गौरवांवित हैं।

दरअसल, अम्बिकापुर के गोधनपुर निवासी अनिल सिंह के पुत्र निशांत सिंह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान हैदराबाद में वरिष्ठ विज्ञानी (सीनियर साइंटिस्ट) के पद पर पदस्थ है। यही कारण हैं कि निशांत को चंद्रयान-3 के सफल प्रक्षेपण का हिस्सा बनाया गया। वह उन वरिष्ठ विज्ञानियों की टीम में शामिल हैं जिन्होंने चंद्रयान-3 में अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्ररोमीटर स्थापना में योगदान दिया है। इसी उपकरण के माध्यम से यह यान चंद्रमा में मिट्टी, पत्थर जैसे तत्वों का विश्लेषण करेगा।

इस सफलता के लिए पूरे देश में जश्न मनाया जा रहा है। वहीं, निशांत सिंह की मां रत्ना सिंह ने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता के लिए सुबह से पूजा-पाठ कर रहे थे। टीवी पर नजर गड़ाए हुए थे, निशांत बचपन से पढ़ाई में अच्छा था, जो आगे चलकर इसरो तक पहुंचा। आज बहुत खुशी हो रही है और गर्व महसूस हो रहा है। देश के लिए गर्व की बात है तो हमारे परिवार के लिए और भी ज्यादा गर्व की बात है। हमारा बेटा आगे बढ़ रहा है, देश के लिए इतना बड़ा काम कर रहा है।








































