BILASPUR. जिले के बिल्हा थाने में अपने सामने पिता की पिटाई से क्षुब्ध होकर छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए डीजीपी को इस मामले में नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही यह भी बताना होगा कि पीड़ित परिवार को कोई राहत दी गई है या नहीं।
आपको बता दें कि बीते दिनों बिल्हा क्षेत्र के भैंसबोड़ निवासी छात्र हरीश गेंदले की बाइक एक स्कूली छात्रा की साइकिल से टकरा गई थी। उनके बीच विवाद हुआ और फिर छात्रा ने थाने में इसकी शिकायत कर दी। बाद में पुलिस ने हरीश और उसके पिता भागीरथी को थाने बुलाया। वहां एक आरक्षक ने न सिर्फ दोनों से हुज्जतबाजी की, बल्कि हरीश के पिता भागीरथी की उसी के सामने जमकर पिटाई भी कर दी थी। इस दौरान उसने उसके पिता पर दबाव भी डाला कि वह 20 हजार रुपये उसे दे ताकि मामले को कमजोर कर जा सके। लेकिन, अपने सामने पिता की पिटाई से हरीश काफी क्षुब्ध हो गया और फिर बीते सोमवार को उसने ट्रेन से कटकर आत्महत्या कर ली। इस मामले तब तूल पकड़ा जब अगले दिन मंगलवार को परिजनों के साथ ही गांववालों ने पुलिस प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव कर दिया और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़ गए।
इस खबर को tirandaj.com ने भी प्रमुखता से आप तक उपलब्ध कराया था। अब जो ताजा मामला निकलकर सामने आया है उसके मुताबिक मीडिया में प्रकाशित इस मामले से जुड़ी खबरों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। इसी के तहत न सिर्फ छत्तीसगढ़ डीजीपी को नोटिस जारी किया है, बल्कि इसे अपनी वेबसाइट के मीडिया सेक्शन और अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी सार्वजनिक किया है।
ये लिखा है पत्र में
आयोग ने डीजीपी को जो नोटिस जारी किया है उसमें स्पष्ट लिखा है कि 23 वर्षीय छात्र ने चलती ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली, क्योंकि वह अपने पिता को पीटते हुए देखने का अपमान सहन नहीं कर सका। मीडिया रिपोर्ट की सामग्री यदि सत्य है तो ये पीड़ितों के जीवन और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है। जाहिर तौर पर, बाइक से किसी को टक्कर मारने के एक मामूली मुद्दे के परिणामस्वरूप पुलिस ने सत्ता का दुरूपयोग किया है। न केवल पीड़ित के पिता को अवैध रूप से गिरफ्तार किया गया और हिरासत में लिया गया, बल्कि उसे बुरी तरह पीटा भी, जैसा कि समाचार रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। बेटे ने अपने पिता को पुलिस द्वारा पिटते हुए देखकर अपमान सहा और शर्मिंदगी के मारे आत्महत्या कर ली। पुलिस कर्मियों के स्पष्ट असंवेदनशील और अमानवीय रवैये के कारण एक अनमोल मानव जीवन खो गया है।
आयोग ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर मामले में जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई सहित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि पीड़ित परिवार को कोई राहत दी गई है या नहीं।
विशेष प्रतिवेदक जाएंगे थाने
आयोग ने ये भी स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के लिए अपने विशेष प्रतिवेदक उमेश कुमार शर्मा को संबंधित थाने का दौरा करने के लिए कहा है ताकि तुरंत पता लगाया जा सके कि डीके बसु बनाम शीर्ष अदालत के निर्देश को लेकर यहां कितनी गंभीरता है। पश्चिम बंगाल राज्य 1997 (1) SCC 416 का संबंधित जिले के पुलिस अधिकारियों द्वारा उल्लंघन किया गया है। लोक सेवक की अपराधीता का पता लगाने के लिए, जिसने पीड़ित को यातना के तहत रखा था, जो संवैधानिक रूप से निषिद्ध है। उनकी रिपोर्ट दो महीने में आने की उम्मीद है।






































