BILASPUR NEWS. अरपा नदी के बढ़ते प्रदूषण को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश कर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि बिलासपुर शहर से प्रतिदिन निकलने वाले सीवेज का करीब 40 प्रतिशत, यानी 28.30 MLD गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के अरपा नदी में बह रहा है।

हाईकोर्ट में पेश किए गए इस आंकड़े ने अरपा के प्रदूषण की गंभीर स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि शहर में रोजाना औसतन 72.20 MLD सीवेज निकल रहा है, जबकि वर्तमान में केवल 43.90 MLD गंदे पानी का ही उपचार हो पा रहा है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई।

78 MLD क्षमता, फिर भी पूरा ट्रीटमेंट नहीं
वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ की ओर से दाखिल शपथपत्र के अनुसार वर्ष 2026 में बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की अनुमानित आबादी 6 लाख 68 हजार 540 है। शहर में कुल 78 MLD क्षमता के चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मौजूद हैं। इसके बावजूद मौजूदा व्यवस्था के तहत 43.90 MLD सीवेज का ही उपचार किया जा रहा है, जबकि शेष गंदे पानी का एक बड़ा हिस्सा नदी में पहुंच रहा है।
70 नालों से अरपा पर बढ़ रहा दबाव
सरकार ने अपने शपथपत्र में बताया कि बिलासपुर शहर में कुल 70 नाले हैं। इनमें 35 नाले उत्तरी और 35 दक्षिणी क्षेत्र में हैं। इनमें से 11 प्रमुख नालों के जरिए गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, लेकिन कई स्थानों पर सीवेज सीधे अरपा नदी में पहुंच रहा है।

मंगला में बन रहे 16 MLD के दो नए प्लांट
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने के लिए मंगला क्षेत्र में कुल 16 MLD क्षमता के दो नए STP बनाए जा रहे हैं। मंगला-बी में 10 MLD क्षमता वाले STP का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। मशीनों से जुड़ा शेष कार्य 31 दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं मंगला-डी में 6 MLD क्षमता वाले STP का सिविल और मशीनरी कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल प्लांट का ट्रायल चल रहा है।

नए प्लांट शुरू हुए तो 94 MLD होगी क्षमता
दोनों नए प्लांट चालू होने के बाद बिलासपुर शहर की कुल सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता 78 MLD से बढ़कर 94 MLD हो जाएगी।
सरकार ने यह भी कहा है कि नगरीय प्रशासन विभाग एक नई तकनीकी कार्ययोजना तैयार कर रहा है, जिसका उद्देश्य मौजूदा ट्रीटमेंट प्लांटों की पूरी क्षमता का उपयोग करना और 100 प्रतिशत सीवेज का उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि गंदा पानी साफ होने के बाद ही अरपा नदी में छोड़ा जा सके।





































