BILASPUR NEWS. वेतन निर्धारण में विभागीय गलती से हुए अतिरिक्त भुगतान की पांच साल बाद वसूली को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ जारी रिकवरी आदेशों को निरस्त करते हुए अब तक वसूली गई राशि कर्मचारियों को वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं। फैसले से लंबे समय बाद वसूली की कार्रवाई झेल रहे कई शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

मामले में कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पांडे और सुंदरा साहू ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान उनकी किसी गलती से नहीं, बल्कि विभाग द्वारा वेतन निर्धारण में हुई त्रुटि के कारण हुआ था। ऐसे मामलों में पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद तृतीय श्रेणी कर्मचारियों से अतिरिक्त राशि की वसूली करना नियमसम्मत नहीं है।

इन कर्मचारियों को मिली राहत
याचिकाकर्ताओं में कंपनी कमांडर आर.एल. खूंटे, इंस्पेक्टर विनोद शर्मा, सब इंस्पेक्टर उमाशंकर पाण्डेय, एएसआई एल.बी. सिंह, एपीसी दिनेश दुबे, हवलदार शांतिलाल साहू तथा राजस्व विभाग के पटवारी शांतिलाल साहू सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के तीन प्रमुख फैसलों का हवाला दिया गया। इनमें जोगेश्वर साहू मामला (2025), थॉमस डेनियल बनाम स्टेट ऑफ केरल (2022) और स्टेट ऑफ पंजाब बनाम रफीक मसीह (2015) शामिल हैं। इन नजीरों के आधार पर दलील दी गई कि कर्मचारी की गलती के बिना वर्षों बाद अतिरिक्त भुगतान की वसूली करना न्यायसंगत नहीं है।

कोर्ट ने माना- बरसों बाद रिकवरी उचित नहीं
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नजीरों को ध्यान में रखते हुए कर्मचारियों के खिलाफ जारी रिकवरी आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही जिन कर्मचारियों के वेतन से राशि पहले ही काटी जा चुकी है, उसे वापस लौटाने के निर्देश दिए। फैसले से पुलिस और राजस्व विभाग के ऐसे कर्मचारियों को राहत मिली है, जिनसे विभागीय वेतन निर्धारण की गलती के चलते लंबे समय बाद अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जा रही थी।






































