RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन प्रदेश की सांस्कृतिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठा। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धर्मजीत सिंह ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए पुरातत्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अजय चंद्राकर ने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ का ऐसा समग्र अभिलेखागार तैयार नहीं हो सका है, जहां प्रदेश के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और पुरातात्विक धरोहरों का व्यवस्थित दस्तावेज उपलब्ध हो। उन्होंने आरोप लगाया कि सिरपुर, भोरमदेव, राजिम, बारसूर सहित अनेक ऐतिहासिक स्थलों से प्राप्त प्राचीन मूर्तियों और अवशेषों का समुचित रिकॉर्ड और संरक्षण नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने महंत घासीदास संग्रहालय का उल्लेख करते हुए कहा कि सिरपुर से प्राप्त सातवीं शताब्दी की भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ प्रतिमा, जिसकी कीमत करीब 19 करोड़ रुपये आंकी गई है, 1980 के दशक में चोरी हो गई थी। हाल ही में यह प्रतिमा अमेरिका में प्राचीन कलाकृतियों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के पास बरामद हुई है और इसे भारत वापस लाने की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन संग्रहालय में प्रतिमा से संबंधित मूल रजिस्टर दीमक लगने से नष्ट हो जाने के कारण विभाग आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे प्रतिमा की वापसी की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

अजय चंद्राकर ने इसे विभागीय लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए कहा कि यदि संग्रहालयों के मूल अभिलेख ही सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रदेश की अन्य ऐतिहासिक धरोहरों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में पुरातत्व संरक्षण, शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रदेश में केवल एक स्थान पर ही पुरातात्विक खुदाई का कार्य चल रहा है, जबकि कई महत्वपूर्ण स्थल उपेक्षा का शिकार हैं। उन्होंने पुरखौती मुक्तांगन की भूमि अन्य कार्यों के लिए आवंटित किए जाने का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि जहां खुला मानव संग्रहालय विकसित होना था, वहां मूल उद्देश्य से हटकर कार्य किए जा रहे हैं।
विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि ताला, मल्हार, बिलासपुर और भोरमदेव जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी आधुनिक संग्रहालयों का अभाव है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का समुचित संरक्षण नहीं हो पा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरगुजा के रामगढ़ स्थित प्राचीन नाट्यशाला जैसी ऐतिहासिक धरोहरें भी पर्याप्त संरक्षण के अभाव में उपेक्षित हैं।
वहीं, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण का कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सहयोग से लगातार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए संग्रहालयों की स्थापना के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं तथा भोरमदेव मंदिर के संरक्षण एवं विकास के लिए केंद्र सरकार ने 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

मंत्री ने कहा कि महंत घासीदास संग्रहालय में रजिस्टर नष्ट होने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही राज्य में आधुनिक अभिलेखागार विकसित करने और मध्यप्रदेश में सुरक्षित छत्तीसगढ़ से जुड़े लाखों दस्तावेजों का डिजिटलीकरण कर उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया भी जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेख एक ही स्थान पर उपलब्ध कराए जाएंगे।





































