NEW DELHI NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिका ने दावा किया है कि उसने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर करीब पांच घंटे तक अभियान चलाकर मिसाइल, ड्रोन और रक्षा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला करने और एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। दोनों देशों के दावों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अभियान के दौरान बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास समेत कई स्थानों पर सटीक हमले किए गए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता, विशेषकर मिसाइल और ड्रोन नेटवर्क को कमजोर करना था। साथ ही उसने बताया कि मध्य-पूर्व में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

दूसरी ओर, IRGC ने दावा किया कि उसने बहरीन के अल-जुफैर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हथियार भंडार, सैटेलाइट संचार केंद्र और सैनिकों से जुड़ी इमारत को निशाना बनाया। ईरान ने एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है।

तेल बाजार पर दिखा असर
बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन कीमतों और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

युद्ध से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम
अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर पांच घंटे तक अभियान चलाने का दावा किया। बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को निशाना बनाए जाने की बात कही। अमेरिकी सेना के अनुसार हमले का लक्ष्य मिसाइल, ड्रोन और रक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचाना था। मध्य-पूर्व में 50 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर तैनात हैं। IRGC ने बहरीन के अल-जुफैर स्थित अमेरिकी बेस पर जवाबी हमला करने का दावा किया। ईरान ने अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया।






































