BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला अंतर्गत बैकुंठपुर से मानवता को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आश्रय देने के बहाने दो अनाथ बच्चों को बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया और 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान दो टूक कहा कि बच्चों का कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति अदालत के लिए सर्वोपरि है।

दरअसल, माता-पिता के साये से महरुम बैकुंठपुर के दो अनाथ बच्चे (12 वर्षीय बच्ची और उसका 9 वर्षीय छोटा भाई) अपनी मुंहबोली दीदी और जीजा के घर पर रह रहे थे। आरोप है कि इस दौरान दोनों मासूमों को भयानक शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं। लगातार हो रही क्रूरता से तंग आकर दोनों भाई-बहन किसी तरह अपनी दीदी-जीजा के चंगुल से भाग निकले और एक परिचित के घर पहुंचे। मामले की जानकारी लगते ही पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचित किया गया। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को रेस्क्यू किया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें बाल संरक्षण गृह भेजा।

काउंसलिंग में हुआ खौफनाक खुलासा
चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में विशेषज्ञों द्वारा जब बच्चों की गहन काउंसलिंग की गई, तो दिल दहला देने वाली सच्चाई सामने आई। पीड़ित बच्ची ने रोते हुए बताया कि उसे पनाह देने वाले मुंहबोले जीजा ने उसे बंधक बनाकर उसके साथ कई बार दुष्कर्म (रेप) किया। वहीं उसके 9 साल के मासूम भाई को भी लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। इस खौफनाक खुलासे के बाद चाइल्ड वेलफेयर सेंटर की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी जीजा के खिलाफ तत्काल पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
इस बीच, मामले में उस वक्त नया मोड़ आ गया जब बच्चों की मुंहबोली बहन ने कानूनी दांव-पेंच का सहारा लेकर खुद को बचाने और बच्चों को दोबारा अपनी कस्टडी में लेने की नीयत से हाईकोर्ट में ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण’ (Habeas Corpus) याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता महिला ने अदालत में झूठा दावा किया कि उसकी बहन और भाई को प्रशासन द्वारा अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में कैद रखा गया है।

उच्च न्यायालय ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को दोनों बच्चों को सशरीर कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। न्यायालय के आदेश के परिपालन में बीते मंगलवार को कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव, अंबिकापुर के अपर कलेक्टर राम सिंह ठाकुर और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दोनों बच्चों को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। इस दौरान शासकीय अधिवक्ता द्वारा राज्य शासन की ओर से कोर्ट के समक्ष पूरे घटनाक्रम का वास्तविक ब्यौरा और दस्तावेज पेश किए गए।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को गुमराह किया
रिकॉर्ड्स और प्रशासनिक रिपोर्ट के अवलोकन के बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पाया कि याचिकाकर्ता महिला ने तथ्यों को पूरी तरह छुपाकर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है। वास्तव में लड़का बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर और लड़की अंबिकापुर बालिका गृह में पूरी तरह सुरक्षित और शासकीय संरक्षण में थे।

मासूमों की मानसिक स्थिति और संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों की काउंसलिंग अदालत कक्ष के बजाय बेहद शांत माहौल में ‘स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी’ में कराने के निर्देश दिए। यह काउंसलिंग एकेडमी की डायरेक्टर और सीनियर एडवोकेट नौशीना अली की सीधी देखरेख में संपन्न हुई। बच्चों से विस्तृत बातचीत के बाद काउंसलिंग रिपोर्ट को पूरी तरह गोपनीय रखते हुए बंद लिफाफे में सीधे हाईकोर्ट को सौंपने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक दोनों बच्चे चाइल्ड वेलफेयर सेंटर के सुरक्षित संरक्षण में ही रहेंगे।





































