BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायालय की अवमानना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि अवमानना की जिम्मेदारी किसी संस्था या विभाग की नहीं, बल्कि आदेश का पालन नहीं करने वाले संबंधित अधिकारी की होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को पक्षकार बनाकर दायर अवमानना याचिका को खारिज कर दिया।

जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अवमानना कार्यवाही व्यक्तिगत उत्तरदायित्व पर आधारित होती है। किसी संस्था, प्राधिकरण या राज्य सरकार को अवमानना का दोषी ठहराकर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की कल्पना कानून की मूल भावना के विपरीत है।

मुआवजा मामले में नहीं हुआ था आदेश का पालन
मामला बिलासपुर निवासी अरविंद कुमार गोयल से जुड़ा है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने NHAI को 90 दिनों के भीतर शिकायतों का निराकरण करने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर कर दी और सीधे NHAI को पक्षकार बना लिया।

‘पूरी संस्था को जेल भेजना हास्यास्पद’
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कलकत्ता और मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अवमानना के मामलों में केवल वही अधिकारी जवाबदेह हो सकता है, जिसने जानबूझकर अदालत के आदेश की अवहेलना की हो। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी संपूर्ण संस्था या राज्य को जेल भेजने की मांग करना कानूनन असंगत और हास्यास्पद है।

नई याचिका दाखिल करने की छूट
हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि वे आदेश का पालन नहीं करने वाले संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाकर नई अवमानना याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला है।
महत्व: यह फैसला भविष्य में दायर होने वाली अवमानना याचिकाओं के लिए महत्वपूर्ण नजीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे स्पष्ट हो गया है कि अदालत के आदेशों की अनदेखी के लिए संस्थाएं नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे।






































