Delhi High Court: नई दिल्ली। दहेज से जुड़े वैवाहिक विवाद से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि शादी के बाद पत्नी को दहेज में “छोटी गाड़ी” और “कम सोना” लाने को लेकर बार-बार ताने मारना भी मानसिक क्रूरता माना जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसे तानों को “मामूली बात” मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दरअसल यह फैसला उत्तर-पूर्वी दिल्ली की एक महिला की संदिग्ध मौत के मामले से जुड़ा है। शादी के महज एक साल के अंदर महिला ससुराल की छत से गिरकर मर गई थी। महिला के पिता ने पुलिस को बताया कि बेटी को पति और ससुराल वाले लगातार दहेज को लेकर परेशान करते थे। पति अक्सर ताना मारता था- “तुम्हारे बाप ने बड़ी गाड़ी देने की बात की थी, लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए। सोना भी कम दिया।”

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने कहा कि ये ताने पहली नजर में दहेज की मांग से जुड़ी प्रताड़ना को दर्शाते हैं। कोर्ट ने माना कि पत्नी को बार-बार ऐसे ताने देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है और इसके आधार पर पति के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है। हालांकि, हाई कोर्ट ने दहेज हत्या (धारा 304B) के आरोप को बहाल नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि इस धारा के तहत साबित करना जरूरी है कि मौत से ठीक पहले दहेज के लिए प्रताड़ना हुई थी, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा स्पष्ट सबूत नहीं मिला।

ट्रायल कोर्ट ने पहले पति को राहत देते हुए कहा था कि वह पहले से विधुर था, उसके दो छोटे बच्चे थे और बच्चों की देखभाल के लिए उसने दूसरी शादी की थी, इसलिए दहेज प्रताड़ना का कोई कारण नहीं। हाई कोर्ट ने इस तर्क को गलत ठहराया और कहा कि दूसरी शादी का कारण चाहे जो भी हो, इससे प्रताड़ना के आरोप अपने आप झूठे नहीं हो जाते।

हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि पति के खिलाफ धारा 498A IPC (पत्नी को क्रूरता) के तहत आरोप तय कर मुकदमा आगे चलाया जाए।



































