LUCKNOW NEWS. उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘शिक्षा मित्र’ एक ऐसा वर्ग है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर ग्रामीण इलाकों के वोट बैंक पर पड़ता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षा मित्रों की समस्याओं के समाधान और उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि के संकेत देना, केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

मानदेय वृद्धि का इतिहास: कब कितनी बढ़ी राशि?
शिक्षा मित्रों के मानदेय के सफर में कई उतार-चढ़ाव आए हैं:
- प्रारंभिक दौर: शिक्षा मित्रों की नियुक्ति के समय उनका मानदेय बहुत कम था।
- सपा सरकार (2014): अखिलेश यादव सरकार ने शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित किया था, जिससे उनका वेतन सीधे ₹30,000 से ऊपर पहुंच गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस समायोजन को रद्द कर दिया।
- योगी सरकार 1.0 (2017): समायोजन रद्द होने के बाद आंदोलन कर रहे शिक्षा मित्रों के लिए योगी सरकार ने मानदेय को ₹3,500 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह किया था। तब से अब तक यह राशि स्थिर बनी हुई है।

राजनीतिक मायने और फायदे
शिक्षा मित्रों पर इस ‘मेहरबानी’ के पीछे कई प्रमुख कारण और फायदे देखे जा रहे हैं:
- विशाल वोट बैंक: प्रदेश में लगभग 1.48 लाख शिक्षा मित्र हैं। यदि उनके परिवारों को जोड़ लिया जाए, तो यह संख्या 5 से 7 लाख मतदाताओं तक पहुंचती है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
- विपक्ष की काट: समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल लगातार शिक्षा मित्रों के समायोजन और मानदेय का मुद्दा उठाते रहे हैं। सरकार के इस कदम से विपक्ष का एक बड़ा चुनावी मुद्दा कमजोर पड़ सकता है।

- ग्रामीण कनेक्ट: शिक्षा मित्र गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात हैं। ग्रामीण परिवेश में उनकी एक शिक्षक और बुद्धिजीवी के रूप में पहचान होती है, जो स्थानीय जनमत को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
- एंटी-इंकम्बेंसी का समाधान: लंबे समय से नाराजगी झेल रही इस श्रेणी को संतुष्ट कर भाजपा आगामी निकाय चुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए अपना आधार मजबूत करना चाहती है।

आगे की राह
शिक्षा मित्रों की मांग केवल मानदेय वृद्धि तक सीमित नहीं है, वे ‘समान कार्य-समान वेतन’ और सेवा सुरक्षा की भी मांग कर रहे हैं। यदि सरकार मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 या ₹18,000 तक ले जाती है, तो यह उनके जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ सरकार के प्रति विश्वास बहाल करने में बड़ी जीत साबित होगी।




































