RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज यानी 7 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के लिए व्यापक विकास ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के खात्मे के बाद प्रदेश में स्थापित शांति का हवाला देते हुए बस्तर को देश के उभरते विकास मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना साझा की। मुलाकात के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण भी दिया, जहां कई अहम परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की तैयारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर समेत पूरे राज्य में अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और क्षेत्र में शांति स्थापित है। उन्होंने इसे विकास की दिशा में बड़ा टर्निंग पॉइंट बताते हुए कहा कि अब बस्तर में डर नहीं, बल्कि अवसरों का माहौल बन रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री द्वारा वर्षों पहले देखा गया बस्तर के विकास का विजन अब जमीनी स्तर पर साकार होने लगा है। सीएम साय ने सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज मॉडल पर आधारित विकास खाका पेश किया।

2027 तक अधूरे सड़क कार्य पूरे करने का लक्ष्य, 228 नई सड़कें और 267 पुल प्रस्तावित, 61 परियोजनाओं के लिए केंद्र से विशेष सहायता की मांग है। इस योजना का फोकस दूर-दराज के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ना और बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार करना है। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार परियोजनाओं से 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। वहीं, 2029 तक 85% परिवारों की आय 15 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना का दायरा भी नए जिलों तक बढ़ाया जा रहा है।

बस्तर में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए इंद्रावती नदी पर बैराज निर्माण, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार जैसी परियोजनाएं प्राथमिकता में हैं। इससे क्षेत्र में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार ने सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवन में बदलने, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाने की योजना बनाई है।

अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने की योजना है। चित्रकोट, तीरथगढ़ जलप्रपात और कांगेर घाटी नेशनल पार्क को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। एडवेंचर टूरिज्म, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी परियोजनाएं भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, अब तक 1 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार मिला है।

मुख्यमंत्री ने बस्तर मुन्ने कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर बदलाव का बड़ा माध्यम बताया। इसके तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं का लाभ मौके पर ही देने और समस्याओं का त्वरित समाधान करने की योजना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश के सामने एक नए मॉडल के रूप में उभरेगा।




































