TEHRAN NEWS. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष आज 31वें दिन में प्रवेश कर गया है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। इस बीच तेल ठिकानों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाए जाने से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ गई है। ईरान की फार्स समाचार एजेंसी के मुताबिक, 31 मार्च की सुबह तब्रीज़ पेट्रोकेमिकल कंपनी की एक यूनिट पर संदिग्ध अमेरिकी-इजरायली हमला हुआ।

इस हमले के बाद वहां आग लग गई, हालांकि राहत टीमों ने तुरंत स्थिति पर काबू पा लिया। इसी बीच, खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की मंशा को लेकर भी बयान सामने आए हैं, जिसे ईरान के सबसे अहम तेल निर्यात केंद्रों में गिना जाता है। इजरायल के वरिष्ठ अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वह पहली बार डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य अड्डे विकसित करने का प्रस्ताव दे सकता है।

इसमें मध्य पूर्व के अन्य देशों में नए अड्डे बनाना और मौजूदा अड्डों का पुनर्स्थापन भी शामिल हो सकता है। संघर्ष का असर खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है। कुवैत में हुए एक हमले में एक भारतीय कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि एक इमारत को भी नुकसान पहुंचा। कुवैत के बिजली, जल और ऊर्जा मंत्रालय ने इस घटना की पुष्टि की है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश किसी भी हमले का “पूरी ताकत” से जवाब देगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर या आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो जवाब बेहद सख्त होगा। उन्होंने क्षेत्रीय देशों से भी अपील की कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए न होने दें।

इसी बीच, मजनून ऑयलफील्ड (इराक) में एक ड्रोन गिरा, जो फटा नहीं। इराक के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन इसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं। इस्लामाबाद में सऊदी अरब, मिस्र, तुर्किये और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति बहाली के विकल्पों पर चर्चा की गई।

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए रखी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर जल्द शांति बहाली और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित और खुला रखने की अपील की। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता तेल आपूर्ति, ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर है। इन सबके बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ समझौता जल्द संभव है। हालांकि, जमीनी हालात फिलहाल किसी ठोस समाधान की ओर बढ़ते नजर नहीं आ रहे हैं।


































