DURG NEWS. जिला न्यायालय दुर्ग में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्यायिक इतिहास में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। आपसी समझौते की भावना के साथ आयोजित इस लोक अदालत में 10,13,730 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया और कुल 49,60,31,667 रुपये की अवार्ड राशि पारित की गई।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश तथा छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha के करकमलों से हुआ। इस अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एवं दुर्ग जिले के पोर्टफोलियो जज Naresh Kumar Chandravanshi भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत न्यायालय परिसर में एनसीसी कैडेट्स की अनुशासित टुकड़ी द्वारा मुख्य न्यायाधीश और पोर्टफोलियो जज की भव्य अगवानी के साथ हुई। अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत केवल लंबित मामलों के बोझ को कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में “सुलह से न्याय” की भावना को मजबूत करने का सशक्त मंच है।

इस अवसर पर लोक अदालत के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पंडवानी शैली में तैयार विशेष गीत का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला न्यायालय बार के सदस्यों की सांस्कृतिक एवं नुक्कड़ नाटक टीम ने पंडवानी गायन और गीत प्रस्तुत कर विधिक जागरूकता का संदेश दिया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की।

39 पीठों ने किया मामलों का निपटारा
लोक अदालत के लिए जिला न्यायालय दुर्ग, परिवार न्यायालय और भिलाई-3, पाटन तथा धमधा स्थित न्यायालयों में कुल 39 पीठों का गठन किया गया था। इन पीठों के समक्ष कुल 10,13,826 प्रकरण आपसी समझौते के लिए रखे गए, जिनमें से 10,13,730 मामलों का निराकरण कर दिया गया।
इनमें समझौता योग्य आपराधिक प्रकरण, दीवानी वाद, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा और प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंक, बिजली तथा दूरसंचार से जुड़े विवाद शामिल रहे। परिवार न्यायालय में काउंसलिंग के जरिए कई बिछड़े दंपतियों ने पुनः साथ रहने का निर्णय लिया, जो सामाजिक सौहार्द की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

तकनीक और नवाचार का भी उपयोग
लोक अदालत की कार्यवाही भौतिक और वर्चुअल दोनों माध्यमों से संचालित की गई। दूरस्थ क्षेत्रों के पक्षकारों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी भागीदारी दर्ज कराई। वहीं मोबाइल अवेयरनेस वैन के जरिए वृद्ध और बीमार पक्षकारों को उनके घर पर ही लोक अदालत की प्रक्रिया से जोड़ा गया।
छात्रों और समाज की भी रही भागीदारी
जिले के विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी लोक अदालत की कार्यवाही का प्रत्यक्ष अवलोकन किया, जिससे उन्हें वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली का व्यावहारिक अनुभव मिला।
इस दौरान न्यायालय परिसर में समाजसेवी संस्था की ओर से पक्षकारों और आमजन के लिए निःशुल्क लंगर (भोजन) की व्यवस्था की गई। साथ ही केंद्रीय जेल दुर्ग के बंदियों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी तथा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने इस सफल आयोजन के लिए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक और पुलिस अधिकारियों तथा सामाजिक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों के अनुसार इस लोक अदालत ने न केवल लंबित मामलों को कम किया, बल्कि न्याय व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा भी और मजबूत किया।




































