BILASPUR NEWS. नारायणपुर जिले के एक निजी स्कूल में KG-2 के छात्र को पेड़ पर रस्सी से बांधकर सजा देने की घटना ने पूरे प्रदेश में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और स्कूल प्रबंधन दोनों को कठघरे में खड़ा किया है।

वारदात के सामने आने के बाद स्पष्ट हुआ कि स्कूल परिसर में न तो बच्चों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी है और न ही किसी तरह का चाइल्ड-सेफ्टी प्रोटोकॉल लागू किया जा रहा है। पांच वर्षीय बच्चे पर कथित तौर पर लंबे समय तक की गई इस अमानवीय सजा से पता चलता है कि स्टाफ की भूमिका और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने इस बात पर कड़ी नाराज़गी जताई कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी तक नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी एक शिक्षक की गलती नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की असफलता है।

अदालत ने स्कूल शिक्षा सचिव को शपथपत्र के साथ यह बताने का आदेश दिया है कि—
- निजी स्कूलों में मॉनिटरिंग तंत्र कैसे काम कर रहा है,
- बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या नियम लागू हैं,
- और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

वीडियो में सामने आई लापरवाही
वायरल वीडियो में घटना सिर्फ बर्बरता ही नहीं दिखाती, बल्कि यह भी उजागर करती है कि स्कूल स्टाफ बच्चों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि कई स्कूलों में अनुशासन के नाम पर मनमाने तरीके अपनाए जा रहे हैं।
दोषी टीचर पर कार्रवाई, लेकिन मूल मुद्दे अब भी बाकी
जिला प्रशासन ने जांच के बाद संबंधित शिक्षिका को हटा दिया और स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल शिक्षक को हटाना समाधान नहीं, आवश्यकता पूरी व्यवस्था में सुधार की है।

चाइल्ड सेफ्टी पॉलिसी क्या सिर्फ कागज़ों में?
घटना से यह भी सामने आया कि:
- स्कूलों में चाइल्ड-सेफ्टी गाइडलाइन प्रभावी तरीके से लागू नहीं,
- स्टाफ को संवेदनशीलता का प्रशिक्षण नहीं मिलता,
- और शिकायत निवारण तंत्र औपचारिकता भर रह गया है।




































