CHHATTISGARH NEWS. छत्तीसगढ़ में रविवार को दो अलग-अलग जगहों से वन्यजीवों की हलचल के वीडियो सामने आए। जशपुर जिले के कुनकुरी शहर में जंगल से भटका एक लोनर हाथी महागिरजा घर और हॉलीक्रॉस अस्पताल परिसर में घुस गया। इस दौरान हाथी ने अस्पताल की बाउंड्रीवॉल को क्षतिग्रस्त कर दिया। वहीं, कांकेर के खपरापारा इलाके में दो जंगली भालुओं के बीच जोरदार भिड़ंत देखने को मिली। दोनों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वन्यजीवों की इस हलचल से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

कुनकुरी शहर में घुसा हाथी, चर्च और अस्पताल परिसर में मची अफरा-तफरी
जशपुर जिले के कुनकुरी में रविवार सुबह जंगल से भटका एक लोनर हाथी शहर के बीचोंबीच पहुंच गया। दल से अलग हुआ यह नर हाथी सबसे पहले महागिरजा घर के परिसर में घुसा। इसके बाद वह पास में स्थित हॉलीक्रॉस अस्पताल परिसर में पहुंच गया। दोनों स्थान कुनकुरी से जशपुर की ओर जाने वाले कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित हैं।

हाथी को चर्च परिसर में देखकर वहां पहुंचे श्रद्धालु घबरा गए। उस समय रविवार की प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए लोगों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, श्रद्धालुओं ने खुद को सुरक्षित करने के लिए प्रार्थना सभागार में शरण ली। इसके बाद हाथी अस्पताल परिसर में पहुंचा और वहां की बाउंड्रीवॉल को क्षतिग्रस्त कर दिया।

हाथी की गतिविधियों का वीडियो कुनकुरी नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया। बताया जा रहा है कि हाथी भटकते हुए जय स्तंभ चौक के पास तक पहुंच गया था। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जमा हो गई। हालांकि, अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। कुछ देर बाद हाथी वापस जंगल की ओर लौट गया।
चेतावनी नहीं मिलने पर लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह हाथी पिछले कुछ दिनों से कुनकुरी के आसपास के जंगलों में भटक रहा था। ऐसे में नगर में उसके प्रवेश से पहले चेतावनी नहीं मिलने पर लोगों ने नाराजगी जताई है।
वन विभाग ने हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है। साथ ही लोगों से अपील की है कि हाथी के नजदीक जाकर वीडियो न बनाएं और उसे घेरने या उकसाने की कोशिश न करें। जशपुर जिले के आठ में से पांच विकासखंड हाथियों की आवाजाही से प्रभावित बताए जाते हैं। इनमें दुलदुला, कुनकुरी और तपकरा वन परिक्षेत्र में हाथियों की गतिविधियां लगातार देखी जाती हैं।
जशपुर में तीन साल में हाथियों के हमले से 26 मौतें
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जशपुर जिले में वर्ष 2024 में हाथियों के हमले से 14 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2025 में 10 लोगों की जान गई। वर्ष 2026 में जनवरी से सितंबर तक दो लोगों की मौत दर्ज की गई। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, तीन वर्षों में हाथियों के हमले से कुल 26 लोगों की जान जा चुकी है।
मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है। ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उनकी मौजूदगी की सूचना मिलने पर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और प्रभावित गांवों तक समय पर सूचना पहुंचाने पर भी जोर दे रहा है।
कांकेर में दो जंगली भालुओं के बीच जोरदार भिड़ंत
इधर, कांकेर जिले के खपरापारा क्षेत्र में दो जंगली भालुओं के बीच संघर्ष का वीडियो सामने आया है। जानकारी के अनुसार, दोनों भालू जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके की सीमा के पास एक खुले मैदान में पहुंच गए थे। इसी दौरान दोनों आमने-सामने आ गए और उनके बीच जोरदार भिड़ंत शुरू हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोनों भालू पिछले पैरों पर खड़े होकर एक-दूसरे पर पंजों से वार करते और उन्हें दबोचने की कोशिश करते नजर आए। कुछ मिनट तक चले इस संघर्ष के दौरान दोनों लगातार गुर्राते रहे। रास्ते से गुजर रहे लोगों ने इस घटना को मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में दोनों भालू एक-दूसरे से भिड़ते दिखाई दे रहे हैं।
कुछ देर तक संघर्ष करने के बाद दोनों भालू अलग हो गए और झाड़ियों की ओर चले गए। हालांकि, उनके बीच भिड़ंत की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भोजन, पानी या क्षेत्र पर वर्चस्व को लेकर वन्यजीवों के बीच संघर्ष होने की संभावना जताई जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के बीच वायरल हुआ वीडियो
कांकेर में भालुओं की भिड़ंत का वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इस दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने पर जोर दिया जा रहा है।
वन्यजीवों की लगातार बढ़ती हलचल को देखते हुए लोगों को जंगल और उसके आसपास के क्षेत्रों में सावधानी बरतने की जरूरत है। हाथी या भालू दिखाई देने पर उनके पास जाने, भीड़ लगाने या वीडियो बनाने के लिए नजदीक पहुंचने से बचना चाहिए। सुरक्षित दूरी बनाए रखना और वन विभाग को सूचना देना ही सबसे बेहतर कदम है।



































