JAGDALPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित विशेष NIA कोर्ट ने शुक्रवार, 5 सितंबर को मामले में सुनवाई करते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है। कोर्ट ने 10 अगस्त को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था।

अभियोजन पक्ष ने मामले में 101 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए थे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी माना। हालांकि, आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने फैसले पर असंतोष जताते हुए इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।
इन 10 आरोपियों को ठहराया गया दोषी
कोर्ट ने प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़कामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा को दोषी करार दिया है।

फैसले के बाद कांग्रेस ने उठाए सवाल
कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि झीरम हमला केवल नक्सली वारदात नहीं, बल्कि राजनीतिक षड्यंत्र और ‘सुपारी किलिंग’ थी। उनका आरोप है कि गिरफ्तार किए गए लोग छोटे स्तर के नक्सली हैं, जबकि हमले के पीछे के बड़े नक्सली आका और कथित षड्यंत्रकारी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी NIA की जांच पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई। वहीं, दिवंगत नेता महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने फैसले को लेकर निराशा जताई और कहा कि न्याय के नाम पर केवल खानापूर्ति हुई है। कांग्रेस नेताओं ने आगे कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर उच्च अदालत का रुख करने की बात कही है।

25 मई 2013 को दहल उठा था झीरम
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में शामिल है। 25 मई 2013 को कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर जा रहा था। झीरम घाटी के घने और दुर्गम इलाके में घात लगाए नक्सलियों ने काफिले पर हमला कर दिया था।
इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।



































