BILASPUR NEWS. बिलासपुर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और जर्जर सड़कों को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। शहर में यातायात का दबाव कम करने के लिए प्रस्तावित कोनी-मोपका बाईपास के निर्माण की समय-सीमा तय नहीं होने पर हाईकोर्ट ने NHAI से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम मोहपात्रा और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की डिविजन बेंच ने NHAI के अधिवक्ता को आवश्यक दिशा-निर्देश लेकर अगली सुनवाई में उपस्थित होने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने 31 अगस्त 2026 के पत्र का संदर्भ आया। इसमें NHAI द्वारा प्रस्तावित कोनी-मोपका बाईपास परियोजना का उल्लेख तो है, लेकिन निर्माण पूरा करने की कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए NHAI से स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
बिलासपुर-रायपुर हाईवे की बदहाली पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र (अमिकस क्यूरी) ने 9 सितंबर की मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। बताया गया कि सड़क की बदहाली के कारण यात्रियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए NHAI को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

चार प्रमुख सड़कों की स्टेटस रिपोर्ट पेश
सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के पालन में शपथ पत्र के साथ बिलासपुर और आसपास की चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इनमें शामिल हैं—
पेंड्रीडीह चौक से नेहरू चौक: 15.315 किलोमीटर
सीपत से बलौदा-कोरबा रोड: 14.40 किलोमीटर
भाटापारा-सिमरिया-चंदखुरी सड़क: 13.15 किलोमीटर
श्रीकांत वर्मा चौक से सीएमडी चौक लिंक रोड: 2.50 किलोमीटर

सड़कों की स्थिति पर कोर्ट की नजर
प्रदेश में जर्जर सड़कों और यातायात संबंधी समस्याओं को लेकर सामने आ रही मीडिया रिपोर्टों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित के रूप में संज्ञान में लिया है। अब कोर्ट की निगाह इस बात पर है कि सड़क परियोजनाओं को लेकर संबंधित विभाग और NHAI किस समय-सीमा में काम पूरा करेंगे। कोनी-मोपका बाईपास को लेकर डेडलाइन स्पष्ट नहीं होने और बिलासपुर-रायपुर हाईवे की खराब स्थिति पर जवाब तलब किए जाने से सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े विभागों पर दबाव बढ़ गया है।






































