RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के शासकीय विद्यालयों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के दायरे में लाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। शिक्षक अपने-अपने जिलों में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का असर अब स्कूलों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑनलाइन अवकाश लिया, जिसके कारण कई स्कूलों में शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हुईं और कुछ विद्यालयों में ताले तक लटक गए।

इस बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षकों के आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार TET अनिवार्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट गई है और विभागीय TET परीक्षा आयोजित कराने की अनुमति मांग रही है। यदि सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश को विभागीय TET कराने की अनुमति देता है, तो छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश में ऐसी परीक्षा आयोजित कराने के विकल्प पर विचार करेगी।

विभागीय TET से मिल सकती है राहत
मंत्री के इस बयान के बाद TET अनिवार्यता से प्रभावित शिक्षकों को राहत की उम्मीद जगी है। यदि मध्य प्रदेश को विभागीय TET आयोजित करने की अनुमति मिलती है, तो छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए विभागीय परीक्षा के जरिए TET पात्रता हासिल करने का रास्ता खुल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षक पात्रता परीक्षा को शिक्षक पद के लिए आवश्यक योग्यता माना है। इसके बाद 29 मई 2026 के फैसले में TET योग्यता हासिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई थी। कोर्ट ने संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों को नियमित अंतराल पर, अधिमानतः साल में दो बार TET आयोजित करने का प्रयास करने के निर्देश भी दिए हैं।

TET की अनिवार्यता को लेकर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों में लगातार नाराजगी है। शिक्षक संगठन विभागीय परीक्षा के माध्यम से पात्रता हासिल करने का अवसर देने की मांग कर रहे हैं। अब मध्य प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और उसके संभावित फैसले पर छत्तीसगढ़ के शिक्षकों की भी नजर है।





































