NEW DELHI NEWS. अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन के बीच जारी विवाद के बीच भारत ने अपने आधिकारिक नक्शे में बड़ा बदलाव किया है। सर्वे ऑफ इंडिया के अपडेटेड नक्शे में अरुणाचल प्रदेश के चीन सीमा से जुड़े 27 महत्वपूर्ण स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज किया गया है। इनमें पहाड़ी दर्रे, झील, बस्तियां और 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़े स्थल शामिल हैं। यह कदम ऐसे समय सामने आया है, जब चीन लगातार अरुणाचल प्रदेश को ‘जंगनान’ यानी ‘दक्षिण तिब्बत’ बताता रहा है और वहां के अलग-अलग स्थानों के नाम बदलकर अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और चीन की ओर से स्थानों के नाम बदलने से जमीनी स्थिति नहीं बदलती।

अपडेटेड नक्शे में चार प्रमुख पहाड़ी दर्रों को भारतीय नामों के साथ जगह दी गई है। इनमें द्जो ला, रिजा ला, पुकुर ला और थग ला शामिल हैं। इनमें थग ला का विशेष ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती दौर में इस क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ था। इसके अलावा सांबो सरोवर को भी भारतीय नाम के साथ नक्शे में दर्ज किया गया है। नक्शे में शामिल अन्य स्थानों में लॉन्गजू, माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, जसवंत गढ़, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं।

इसके अलावा शेर-ए-थापा मेमोरियल को भी आधिकारिक नक्शे में स्थान दिया गया है। यह स्मारक 1962 के युद्ध में वीरता दिखाने वाले हवलदार शेर-ए-थापा की याद में बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को लेकर चीन की ओर से नाम बदलने की कोशिश नई नहीं है। चीन ने 2017, 2021 और 2023 में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के लिए चीनी नाम जारी किए थे। भारत ने इन सभी प्रयासों को खारिज करते हुए कहा था कि नाम बदलने से अरुणाचल प्रदेश पर भारत की संप्रभुता और प्रशासनिक नियंत्रण की वास्तविकता नहीं बदलती। अब भारतीय आधिकारिक नक्शे में इन स्थानों को भारतीय नामों के साथ दर्ज करना इसी रुख को संस्थागत रूप से दोहराने वाला कदम माना जा रहा है।

सैन्य नक्शों के बाद राजनीतिक नक्शे में पहचान
इनमें से कई स्थान पहले से सैन्य नक्शों में मौजूद रहे हैं। लेकिन अब उन्हें आधिकारिक राजनीतिक नक्शे में भी स्पष्ट पहचान दी गई है। सीमा विवाद वाले क्षेत्रों में किसी स्थान का नाम और आधिकारिक नक्शे में उसकी पहचान केवल भौगोलिक जानकारी नहीं होती। यह किसी देश के प्रशासनिक दावे और क्षेत्रीय स्थिति को भी दर्शाती है। इसलिए इस बदलाव को भारत की ओर से अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को स्पष्ट करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। नक्शे में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।

BRICS से पहले बढ़ा कूटनीतिक महत्व
यह घटनाक्रम सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से पहले सामने आया है। 12-13 सितंबर को प्रस्तावित सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना के बीच दोनों देशों के संबंधों पर नजर बनी हुई है। 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट के बाद भारत-चीन संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा है। हालांकि हाल के समय में दोनों देश संबंधों में सावधानीपूर्वक स्थिरता लाने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS के मंच पर आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की चर्चा होगी, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और LAC पर शांति एवं स्थिरता का मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण बना रहेगा।





































