WASHINGTON NEWS. मध्य-पूर्व में तनाव एक नए स्तर पर पहुंच गया है, जहां डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका ने ईरान को आर्थिक और सामरिक तौर पर घेरने की रणनीति तेज कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट—जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। अब वैश्विक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड CENTCOM के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की गई है। इसका सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात पर पड़ेगा।

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि ईरान के साथ तेल कारोबार रोकने के लिए है। हालांकि रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि कुछ ईरान से जुड़े जहाज इस घेराबंदी को पार करने में सफल रहे। 10,000 से ज्यादा सैनिक और लगभग 12 नेवल शिप तैनात कर दिए गए हैं। पहले 24 घंटों में कोई जहाज पार नहीं कर पाया और 6 व्यापारिक जहाजों को बीच रास्ते से लौटाया गया है।

अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह चीन को ईरानी तेल खरीदने से रोकेगा। होर्मुज के रास्ते ईरान से तेल ले जा रहे चीनी जहाजों को गुजरने नहीं दिया जाएगा। इस कदम से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने संकेत दिया है कि ईरानी तेल की बिक्री पर दी गई अस्थायी छूट जल्द खत्म कर दी जाएगी और इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

यूरोपीय देश होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मिशन की योजना बना रहे हैं, लेकिन खास बात यह है कि इस प्रस्तावित गठबंधन में अमेरिका को शामिल नहीं किया गया है।यह कदम ट्रांस-अटलांटिक मतभेदों को भी दिखाता है। अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में लेबनान और इजराइल के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत का पहला दौर सकारात्मक रहा।

दोनों पक्ष अगले दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं, हालांकि तारीख अभी तय नहीं हुई है। इस बीच हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने 24 घंटों में 34 हमले किए, जिनमें इजराइली ठिकानों और सैन्य संसाधनों को निशाना बनाया गया। कनाडा ने लेबनान के लिए 40 मिलियन डॉलर (करीब 330 करोड़ रुपए) की सहायता का ऐलान किया है, जो अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिए दी जाएगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मौजूदा सीजफायर बढ़ाने से इनकार कर दिया है। अगले 2 दिन को बेहद अहम बताया। ट्रंप ने कहा कि युद्ध किसी भी तरह खत्म हो सकता है। कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता, लेकिन दबाव की रणनीति जारी रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान में अब नई तरह की सरकार है, जहां कट्टरपंथियों को हटाया गया है।
CENTCOM के मुताबिक ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से निकलने वाले हर जहाज पर नजर होगा। हर देश के जहाजों पर समान नियम लागू होंगे। एक-एक अमेरिकी डिस्ट्रॉयर पर 300 से ज्यादा प्रशिक्षित नौसैनिक तैनात किए गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता सैन्य तनाव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का संकेत है। तेल आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति—तीनों मोर्चों पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले 48 घंटे इस पूरे संकट की दिशा तय कर सकते हैं।



































