DURG NEWS. आम जनता को सुलभ, त्वरित और पारदर्शी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में दुर्ग जिले में एक बड़ा कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने दुर्ग में नवीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण हेतु विधिवत भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इस अवसर पर आम जनता और पक्षकारों की सहूलियत के लिए कई हाईटेक डिजिटल सुविधाओं की शुरुआत की गई, वहीं ग्रामीण स्तर पर आपसी संवाद से विवाद सुलझाने की पहल को भी नया संबल मिला।

आम जनता को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नया न्यायालय परिसर अत्याधुनिक अधोसंरचना से लैस होगा। इससे न केवल न्यायिक अधिकारियों और वकीलों को बेहतर कार्य परिवेश मिलेगा, बल्कि अदालत आने वाले नागरिकों व पक्षकारों को बैठने की उचित व्यवस्था, साफ-सुथरा परिसर और आधुनिक नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी।

कोर्ट में अब कैशलेस भुगतान और ई-टिकट की सुविधा
न्यायिक प्रक्रियाओं को आमजन के लिए आसान और पारदर्शी बनाने हेतु हाईकोर्ट की आईटी टीम द्वारा विकसित कई डिजिटल सेवाओं का शुभारंभ किया गया:
- कैशलेस फाइन पेमेंट सुविधा: अब कोर्ट में जुर्माना भरने के लिए नकद राशि साथ रखने या लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं होगी; डिजिटल माध्यम से सीधे जुर्माना अदा किया जा सकेगा।
- कोर्ट फीस टिकट जनरेशन सिस्टम: कोर्ट फीस टिकट प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और झंझट-मुक्त बनाया गया है।
- AFR मोबाइल एप्लिकेशन (Android): न्यायिक प्रक्रियाओं और सेवाओं को मोबाइल के जरिए अधिक सुलभ बनाने के लिए ऐप पेश किया गया।

‘संधि सेतु’: अदालत के बाहर, संवाद से सुलझेंगे विवाद
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग द्वारा तैयार की गई पुस्तक ‘संधि सेतु’ का विमोचन किया गया। यह पहल सामुदायिक मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए है, ताकि ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर छोटे-मोटे विवाद कोर्ट-कचहरी पहुंचने से पहले ही आपसी बातचीत, सहमति और समझाइश से सुलझाए जा सकें। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा तथा सामाजिक सौहार्द मजबूत होगा।

मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी है, जब न्याय आम जनता के निकट, सरल और पारदर्शी हो। कार्यक्रम के अंत में परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश श्रीमती सुमन एक्का ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधिपति के साथ न्यायमूर्ति पीपी साहू, न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल, न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु एवं न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।






































