RAIPUR NEWS. रायपुर के सक्ती गांव स्थित ब्लू वाटर खदान में डूबे मोदहापारा निवासी आदिल खान का शव करीब 75 घंटे बाद बरामद कर लिया गया। 19 अगस्त की शाम तैरने के दौरान आदिल गहरे पानी में चला गया था और इसके बाद से एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें उसकी तलाश में जुटी थीं। शनिवार को खदान में शव तैरता मिला, जिसके बाद रेस्क्यू टीम ने उसे बाहर निकाला। आदिल के डूबने की सूचना के बाद बुधवार शाम से ही खदान में तलाश अभियान शुरू कर दिया गया था। शनिवार सुबह करीब 6 बजे बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। परिजनों के साथ स्थानीय लोगों के अलावा कांग्रेस-भाजपा के स्थानीय नेता भी वहां मौजूद रहे।

प्रशासन के मुताबिक, ब्लू वाटर खदान काफी गहरी है। करीब 400 फीट तक गहराई होने के कारण रेस्क्यू टीमों को पानी के भीतर तलाश करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। टीमों के पास इतनी गहराई तक जाकर सर्च करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने की बात भी सामने आई। परिजनों को बाद में करीब 500 फीट तक पानी के भीतर तलाश करने वाले कैमरे की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई थी। प्रशासन की ओर से विशेषज्ञ गोताखोरों को भी तलाश अभियान में लगाया गया। इसी बीच करीब 75 घंटे बाद आदिल का शव पानी में तैरता मिला।

अब खदान को किया जाएगा प्रतिबंधित
लगातार हो रहे हादसों के बाद सरकार ने ब्लू वाटर खदान को लेकर सख्त कदम उठाने की बात कही है। आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा है कि ब्लू वाटर खदान को प्रतिबंधित किया जाएगा। इसके साथ ही खदानों के आसपास फेंसिंग कराने की भी तैयारी है। इसका उद्देश्य लोगों को गहरे और खतरनाक जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से रोकना है।

हादसों के बाद प्रशासन की चुनौती
ब्लू वाटर खदान में आदिल की मौत ने एक बार फिर बंद और जलभराव वाली खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे स्थानों पर पानी की वास्तविक गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है और तैरने के लिए पहुंचने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। अब सरकार की ओर से खदान क्षेत्र को प्रतिबंधित करने और चारों ओर फेंसिंग कराने का फैसला ऐसे हादसों को रोकने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जरूरत इस बात की भी है कि अन्य खतरनाक खदानों और जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां भी लोगों की आवाजाही रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।






































