UTTAR PRADESH NEWS : प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में वकालत पेशे की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि कुछ लोग वकालत की आड़ में गैंगस्टर, माफिया और आपराधिक तत्वों की तरह काम कर रहे हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी डॉ. कफील खान बनाम उत्तर प्रदेश सरकार मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 4,157 अधिवक्ता 5,056 आपराधिक मामलों में आरोपी हैं।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने कहा कि यह स्थिति न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश बार काउंसिल और बार एसोसिएशनों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कई वकीलों पर दर्जनों मुकदमे
अदालत में पेश रिपोर्ट के मुताबिक, 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक, 126 पर पांच से दस, जबकि 28 वकीलों पर 11 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ अधिवक्ताओं के खिलाफ 46 तक आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, लेकिन वे अब भी अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे हैं।

लखनऊ में सबसे ज्यादा मामले
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मामले लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में दर्ज हैं, जहां 917 अधिवक्ताओं के खिलाफ 586 आपराधिक मामले लंबित हैं। इसके अलावा बरेली, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर नगर भी ऐसे जिलों में शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

बार काउंसिल पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं के सत्यापन अभियान में केवल 105 फर्जी डिग्रीधारी वकीलों की पहचान होना वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता। अदालत ने माना कि बार काउंसिल अपने नियामक दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में विफल रही है।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश
कोर्ट ने गंभीर मामलों में आरोपित अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, लाइसेंस निलंबन पर विचार, फर्जी डिग्रीधारी वकीलों पर एफआईआर, 5.37 लाख पंजीकृत अधिवक्ताओं के ऑडिट और अधिवक्ता नामांकन के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
अपने आदेश में न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा, “कानून दो बार मरता है—पहली बार जब उसके संरक्षक ही अपराधी बन जाते हैं और दूसरी बार जब न्यायाधीश चुप्पी साध लेते हैं।” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब सभी की नजर राज्य सरकार और बार काउंसिल की आगामी कार्रवाई पर है।





































