WASHINGTON NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के रणनीतिक हितों पर भी पड़ता दिख रहा है। अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान के चाबहार पोर्ट के कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचने की खबर ने भारत की व्यापारिक और सामरिक योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

चाबहार पोर्ट भारत के लिए केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का सबसे अहम व्यापारिक गलियारा है। भारत ने इस परियोजना में बड़ा निवेश किया है और इसका संचालन भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) करती है। ऐसे में इस पोर्ट पर हुआ हमला भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और रणनीतिक हितों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों की मदद से तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया गया। इसी दौरान चाबहार पोर्ट का कंट्रोल टावर भी हमले की चपेट में आ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चाबहार पोर्ट का संचालन लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापार प्रभावित हो सकता है। साथ ही चीन समर्थित पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के मुकाबले भारत की रणनीतिक बढ़त पर भी असर पड़ सकता है।

मध्य-पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और भारत के आयात-निर्यात पर भी पड़ सकता है।






































