RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं। उनके निधन से लोककला जगत में शोक की लहर है। 24 अप्रैल 1956 को दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई का बचपन आर्थिक अभावों में बीता। उनके पिता हुकुमचंद परधा और माता सुखवती बाई थीं। पंडवानी की शुरुआती शिक्षा उन्हें अपने नाना ब्रजलाल परधा से मिली। महज 13 वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी और आगे चलकर इस लोककला की सबसे बड़ी पहचान बन गईं। उन्होंने उस समय की परंपरा को तोड़ते हुए महिलाओं के बैठकर प्रस्तुति देने की शैली के बजाय पुरुष कलाकारों की कापालिक शैली में खड़े होकर अभिनय, संवाद और गायन के साथ पंडवानी प्रस्तुत की। यही शैली उनकी विशिष्ट पहचान बनी और उन्हें देश-दुनिया में अलग मुकाम दिलाया।

हबीब तनवीर ने दिया बड़ा मंच
प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अवसर दिलाए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के सामने अपनी प्रस्तुति दी।इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, जापान, तुर्की और मॉरीशस समेत 17 से अधिक देशों में उन्होंने पंडवानी का प्रदर्शन कर भारतीय लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का परचम लहराया।

सम्मानों से सजा गौरवशाली सफर
लोककला में असाधारण योगदान के लिए तीजन बाई को वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण, 2018 में जापान का प्रतिष्ठित फुकुओका पुरस्कार और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें बिलासपुर विश्वविद्यालय ने मानद डी.लिट. की उपाधि भी प्रदान की।

नई पीढ़ी के लिए बनीं प्रेरणा
तीजन बाई ने केवल पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक नहीं पहुंचाया, बल्कि इस लोकविधा से नई पीढ़ी के कलाकारों, विशेषकर महिला कलाकारों को भी जोड़ने का काम किया। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा, समर्पण और आत्मविश्वास के बल पर लोककला भी विश्व मंच तक पहुंच सकती है।
देशभर से उमड़ी श्रद्धांजलियां
तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत विभिन्न जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए कहा कि उनकी कला और विरासत सदैव आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को अपूरणीय क्षति: राजेश अग्रवाल
प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई का जाना केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को अपूरणीय क्षति है। मंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोकविधा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा दिलाई। उनकी सशक्त प्रस्तुति, अद्भुत अभिनय और प्रभावशाली गायन ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को विश्वभर में सम्मान दिलाया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।






































