WASHINGTON NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष ने अब बेहद गंभीर रूप ले लिया है। लगातार चौथे दिन अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, करीब सात घंटे तक चले इस अभियान में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास स्थित मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक संसाधनों और तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी व सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ईरान का जवाबी हमला, अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पलटवार का दावा किया। ईरान के अनुसार, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागी गईं। ईरान ने विशेष रूप से बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस और जॉर्डन के अजराक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही है। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

ट्रंप की सख्त चेतावनी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तेहरान वार्ता के लिए आगे नहीं आता, तो अगले चरण में उसके बिजलीघर, पावर ग्रिड और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

ईरान बोला—दबाव में नहीं झुकेंगे
ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी हमलों और धमकियों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि देश किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। ईरान ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट सहित पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक गतिविधियां जारी रखेगा तथा हर हमले का जवाब देगा।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव
दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है, क्योंकि इस संघर्ष के और बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।






































