BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सात वर्ष पुराने चर्चित आत्महत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के बरी करने के आदेश को पलट दिया है। हाईकोर्ट ने आरोपी मो. सेराज को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) का दोषी करार देते हुए कहा कि उसकी लगातार प्रताड़ना, शादी के लिए दबाव और जान से मारने की धमकियों ने युवती को इस हद तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया कि उसके पास आत्महत्या के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।

मामला कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र का है। 29 जनवरी 2018 की रात युवती ने अपने कमरे में स्कार्फ का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। अगले दिन उसकी मां ने शव को पाइप से लटका हुआ पाया। घटनास्थल से पुलिस को सुसाइड नोट और मोबाइल फोन मिला था, जिसके आधार पर मृतका की मां की शिकायत पर मो. सेराज के खिलाफ मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की गई।

जांच में सामने आया कि आरोपी लंबे समय से युवती पर शादी का दबाव बना रहा था और लगातार धमकियां दे रहा था। प्रताड़ना से परेशान होकर युवती ने मई 2017 में हाथ की नस काटकर आत्महत्या का प्रयास भी किया था। परिवार और पुलिस की समझाइश के बावजूद आरोपी की हरकतें नहीं रुकीं।

हालांकि, जनवरी 2019 में कोरबा की सत्र अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने और सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग जांच नहीं होने का हवाला देते हुए आरोपी को बरी कर दिया था।

इस फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है। अदालत ने माना कि मृतका की मां की गवाही, मौखिक एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका साबित करने के लिए पर्याप्त हैं और ऐसे मामलों में हैंडराइटिंग विशेषज्ञ की राय अनिवार्य नहीं होती।

हाईकोर्ट ने मो. सेराज को दोषी ठहराते हुए सजा के निर्धारण के लिए 27 जुलाई की तारीख तय की है तथा आरोपी और उसके अधिवक्ता को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।





































