BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकीय और प्रशासनिक संवर्ग की सीमाओं को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि शिक्षकों का मूल दायित्व शिक्षण कार्य करना है, न कि प्रशासनिक पदों का संचालन। इसी के साथ बलौदा में एक व्याख्याता को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) का अतिरिक्त प्रभार देने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया गया है।

जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि शिक्षकीय संवर्ग के कर्मचारियों को प्रशासनिक पदों का प्रभार सौंपना सेवा नियमों और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल प्रभारी प्राचार्य का दायित्व मिलने से कोई व्याख्याता प्रशासनिक संवर्ग का सदस्य नहीं बन जाता।

क्या था विवाद?
मामला बलौदा के प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी रवि कुमार गौतम की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि वे सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) के पद पर कार्यरत हैं और विभाग द्वारा उन्हें प्रभारी बीईओ का दायित्व सौंपा गया था। इसके बावजूद 10 जून 2026 को जारी आदेश के जरिए पीएम श्री स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, बलौदा के प्रभारी प्राचार्य एवं व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया।
याचिका में इस आदेश को नियमों के विपरीत बताते हुए चुनौती दी गई थी।

RTE और सेवा नियमों का हवाला
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि ‘बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के तहत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों को प्रशासनिक दायित्व नहीं सौंपे जा सकते।
अदालत ने यह भी कहा कि बीईओ का पद प्रशासनिक संवर्ग का पद है, जिसे निर्धारित भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया के तहत ही भरा जा सकता है।

पदोन्नति के लिए तय है स्पष्ट व्यवस्था
कोर्ट ने अपने आदेश में छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक पद संवर्ग) भर्ती एवं पदोन्नति नियम, 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि बीईओ पदों पर नियुक्ति की स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित है।
- 75 प्रतिशत पद सहायक खंड शिक्षा अधिकारियों (एबीईओ) की पदोन्नति से भरे जाने हैं।
- शेष 25 प्रतिशत पद पात्र प्राचार्यों के लिए आरक्षित हैं।
ऐसी स्थिति में किसी व्याख्याता को सीधे बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देना नियमों की मंशा के विपरीत है।
हाई कोर्ट का स्पष्ट संदेश
अदालत ने कहा कि शिक्षकीय और प्रशासनिक संवर्ग को अलग-अलग रखने का उद्देश्य प्रशासनिक पदों पर योग्य और पात्र अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है। नियमों की अनदेखी कर दिए गए प्रभार आदेश प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित करते हैं।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार देने संबंधी 10 जून 2026 के आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।

शिक्षा विभाग में दूरगामी असर
हाई कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा विभाग में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में शिक्षकीय संवर्ग के कर्मचारियों को प्रशासनिक पदों का प्रभार देने की प्रथा पर रोक लगेगी तथा विभाग को संवर्गीय नियमों के अनुरूप ही नियुक्तियां और प्रभार वितरण करना होगा।





































