छत्तीसगढ़ में डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच बस संचालकों ने यात्री किराए में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मांग तेज कर दी है। बस मालिकों का कहना है कि वर्ष 2021 के बाद से यात्री बसों के किराए में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि इस दौरान डीजल की कीमतों में करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हो चुका है। लगातार बढ़ती परिचालन लागत के कारण बस संचालन करना मुश्किल होता जा रहा है और यदि जल्द किराया नहीं बढ़ाया गया तो कई बसों का संचालन बंद करना पड़ सकता है।
बस मालिकों के अनुसार डीजल, स्पेयर पार्ट्स, टायर, मेंटेनेंस और कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, लेकिन किराया पुराने ढांचे पर ही चल रहा है। यही वजह है कि प्रदेशभर के बस संचालक लंबे समय से किराया संशोधन की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर बस मालिकों ने छत्तीसगढ़ यातायात परिवहन संघ पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, बस संचालकों की बढ़ती नाराजगी और दबाव के चलते हाल ही में छत्तीसगढ़ यातायात परिवहन संघ के अध्यक्ष अनवर अली ने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था। हालांकि संघ के संरक्षक पुरंदर मिश्रा ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और बस संचालकों की मांगों को सरकार तक पहुंचाने तथा जल्द समाधान निकालने का भरोसा दिलाया। इसके बाद अध्यक्ष ने फिलहाल अपने पद पर बने रहने का निर्णय लिया है।
संघ अध्यक्ष अनवर अली का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में बस संचालन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द किराया वृद्धि पर निर्णय नहीं लिया तो प्रदेश में बड़ी संख्या में यात्री बसें खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई क्षेत्रों में बस संचालकों को मांग के अनुरूप डीजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे कुछ रूटों पर बसों का संचालन पहले ही प्रभावित हो चुका है।
वहीं संघ के संरक्षक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि बस मालिकों की समस्याओं और मांगों से परिवहन मंत्री तथा विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो दिनों में सरकार के साथ चर्चा के बाद इस विषय पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
इधर इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार की नीतियों का असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के कारण अब आम लोगों की यात्रा भी महंगी होने जा रही है, जिससे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
अब सभी की नजर राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई है। यदि बस संचालकों की मांग मान ली जाती है तो प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। वहीं सरकार के सामने बस संचालकों की आर्थिक परेशानियों और आम जनता के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी होगी।



































