TEHRAN NEWS. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और केश्म द्वीप स्थित रडार और ड्रोन कंट्रोल साइट्स पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने का दावा किया है। इसी बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के इस्तीफे की खबरों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी, हालांकि सरकार ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए अफवाह बताया है।

आत्मरक्षा में हमला करने का दावा
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई ईरान की कथित आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई। अमेरिका ने दावा किया कि रविवार को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान ने अमेरिकी MQ1 ड्रोन को मार गिराया था, जिसके बाद जवाबी सैन्य कार्रवाई की गई।

अमेरिकी सेना के मुताबिक, ऑपरेशन में ईरान के एक एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो ड्रोन को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। अमेरिका का आरोप है कि ये ड्रोन समुद्री व्यापारिक मार्गों और जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी एयरबेस को बनाया निशाना
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया। ईरानी सेना का कहना है कि जिस अमेरिकी एयरबेस का इस्तेमाल सीरिक द्वीप के पास सैन्य ऑपरेशन में किया गया, उसे मिसाइलों से निशाना बनाया गया है।
ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई उनके टेलीकॉम टावर पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई। हालांकि, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए निशाना बनाए गए एयरबेस की सटीक लोकेशन सार्वजनिक नहीं की गई।

राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबर से बढ़ी हलचल
सैन्य तनाव के बीच ईरान की राजनीति में भी उथल-पुथल की खबरें सामने आईं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने पद छोड़ दिया है और सत्ता पर अब IRGC कमांडरों का प्रभाव बढ़ गया है।
हालांकि, राष्ट्रपति कार्यालय के संचार एवं सूचना प्रसार विभाग के डिप्टी चीफ सैयद मेहंदी तबातबाई ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के इस्तीफे की खबरें निराधार और महज अफवाह हैं।




































