RAIPUR NEWS. विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर वरिष्ठ कान-नाक-गला विशेषज्ञ डॉ. अनिल जैन ने तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों को लेकर लोगों को आगाह किया है। रूपजीवन हॉस्पिटल, रायपुर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सिर और गले के कैंसर के अधिकांश मामलों की जड़ तंबाकू है और विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में गुटका व खैनी का बढ़ता सेवन चिंता का विषय बन चुका है।

डॉ. जैन के अनुसार, भारत में सिर और गले के कैंसर के लगभग 80 से 90 प्रतिशत मामलों में तंबाकू का सेवन सबसे बड़ा कारण होता है। उन्होंने कहा कि बीड़ी, सिगरेट, गुटका, खैनी और पान मसाले में मौजूद जहरीले तत्व शरीर को धीरे-धीरे गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।

70 से अधिक जहरीले रसायन देते हैं कैंसर को बढ़ावा
विशेषज्ञों के मुताबिक, तंबाकू में 70 से अधिक कार्सिनोजेनिक (कैंसर उत्पन्न करने वाले) रसायन पाए जाते हैं, जो मुंह, गले, स्वरयंत्र और भोजन नली की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। लगातार संपर्क में रहने से कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती हैं।
डॉ. जैन ने स्पष्ट किया कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि धुआंरहित तंबाकू जैसे गुटका और खैनी सुरक्षित होते हैं। उनके अनुसार, ये कई बार धूम्रपान से भी ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं, क्योंकि लंबे समय तक मुंह के भीतर रहने से इनका सीधा असर ऊतकों पर पड़ता है।

मुंह न खुलना भी हो सकता है खतरे का संकेत
उन्होंने बताया कि तंबाकू सेवन से ‘सबम्यूकस फाइब्रोसिस’ जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है, जिसमें धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाता है और समय रहते इलाज न मिलने पर यह कैंसर का रूप ले सकती है।
विशेषज्ञों ने ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी है, जो दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें। इनमें मुंह में सफेद या लाल धब्बे, न भरने वाले छाले, लगातार गले में दर्द, आवाज बैठना, गर्दन में गांठ, निगलने में परेशानी, कान में दर्द और मुंह पूरा न खुल पाना शामिल हैं।

तंबाकू छोड़ने से घटता है कैंसर का खतरा
डॉ. जैन ने कहा कि तंबाकू छोड़ने के बाद कैंसर का खतरा धीरे-धीरे कम होने लगता है। शोध के अनुसार, पांच साल बाद जोखिम काफी घट जाता है, जबकि दस साल बाद यह खतरा लगभग उतना ही रह जाता है जितना किसी ऐसे व्यक्ति में जिसने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया हो।
उन्होंने बताया कि रूपजीवन हॉस्पिटल, रायपुर में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग और तंबाकू छुड़ाने के लिए विशेष काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।




































