BHILAI NEWS. नगर निगम भिलाई में सफाई ठेकेदार को कथित तौर पर नियमों के विपरीत भुगतान किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद पीयूष मिश्रा ने निगम प्रशासन पर गंभीर आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि करीब 1.5 करोड़ रुपये की देनदारी होने के बावजूद एक डिफाल्टर ठेकेदार को 13 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामले को लेकर उन्होंने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में शिकायत दर्ज कराने और एफआईआर की मांग करने की बात कही है।

पार्षद मिश्रा के अनुसार, सफाई कार्य का ठेका लेने वाली संस्था मेसर्स पीवी रमन पर कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई मद में भारी बकाया है। आरोप है कि इसके बावजूद निगमायुक्त राजीव कुमार पांडेय ने भुगतान को मंजूरी देकर नियमों की अनदेखी की। मिश्रा ने इसे आर्थिक अपराध बताते हुए कहा कि मामले को न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

चार आयुक्तों ने लगाई थी रोक, फिर भी जारी हुआ भुगतान
भाजपा पार्षद का आरोप है कि दिसंबर 2022 में समाप्त हो चुके सफाई ठेके के भुगतान पर पूर्व आयुक्तों—रोहित व्यास, देवेश ध्रुव, लोकेश चंद्राकर और बजरंग दुबे—ने रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद 25 मार्च को, जिस दिन सामान्य सभा में आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित हुआ, उसी दिन कथित रूप से ठेकेदार के खाते में 13 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। दावा किया गया है कि 18 लाख रुपये और भुगतान की फाइल भी तैयार है।

ऐसे बना 1.5 करोड़ का बकाया
जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2021 से दिसंबर 2022 तक शहर की सफाई का ठेका पीवी रमन को दिया गया था, जिसे बाद में जनवरी-फरवरी 2023 तक बढ़ाया गया। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने पर हड़ताल की स्थिति बनी, जिसके बाद निगम ने सीधे भुगतान कर ठेकेदार के बिल से राशि काटी थी।
मिश्रा का आरोप है कि कर्मचारियों के पीएफ और ईएसआई की बड़ी राशि अब तक जमा नहीं की गई, जिससे ठेकेदार पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है।

एक घंटे में तीन हस्ताक्षर, भुगतान जारी
पार्षद ने आरोप लगाया कि 25 मार्च को सामान्य सभा में आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित होने के बाद महज एक घंटे के भीतर स्वास्थ्य अधिकारी, आयुक्त और लेखा अधिकारी के हस्ताक्षर से भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।

ईपीएफ खातों में गड़बड़ी का आरोप
मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि संस्था ने अलग-अलग ईपीएफ कोड का उपयोग कर दस्तावेजी गड़बड़ी की और कामगारों की पीएफ राशि को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई। भाजपा पार्षद ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने, संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
हालांकि, इस पूरे मामले में निगम प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।



































