NEW DLEHI NEWS. मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का दूसरा दौर अनिश्चितता में फंसता नजर आ रहा है। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भेजने की बात कही है, वहीं ईरान की ओर से अब तक स्पष्ट सहमति नहीं मिल पाई है। पाकिस्तान का दावा है कि वह दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने माहौल को और जटिल बना दिया है।

ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका बातचीत को समर्पण में बदलना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी तरह की धमकी या दबाव के बीच वार्ता स्वीकार नहीं करेगा। उनके अनुसार, हाल के हफ्तों में ईरान ने सैन्य और रणनीतिक स्तर पर अपनी तैयारी भी बढ़ाई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि संघर्ष विराम का बार-बार उल्लंघन कूटनीतिक प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत में साफ किया कि तेहरान अभी सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम फैसला बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने भी ट्रंप से संपर्क कर हॉर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी को वार्ता में बाधा बताया है। पाकिस्तान इस वार्ता की मेजबानी को लेकर सक्रिय है और उसे उम्मीद है कि दोनों देश बातचीत के लिए तैयार होंगे।

ट्रंप ने दोहराया है कि जब तक ईरान के साथ कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी। उनका दावा है कि मौजूदा संघर्ष में अमेरिका बढ़त बनाए हुए है और समझौते के बाद ही स्थिति में बदलाव संभव होगा।

पाकिस्तान की कोशिशों के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास की खाई गहरी बनी हुई है। हॉर्मुज को लेकर टकराव और सीजफायर उल्लंघन जैसे मुद्दे बातचीत के रास्ते में बड़ी अड़चन हैं। ऐसे में यह अभी साफ नहीं है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता वास्तव में हो पाएगी या नहीं।



































