WASHINGTON NEWS. होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने रुख में अहम बदलाव करते हुए भारत समेत अन्य देशों को रूस से तेल खरीदने की छूट एक बार फिर बढ़ा दी है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह फैसला उस बयान के ठीक दो दिन बाद आया है, जिसमें छूट बढ़ाने से इनकार किया गया था। यह नई अवधि उस 30-दिन की पिछली छूट के बाद लागू हुई है, जो 11 अप्रैल को खत्म हो गई थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वित्त विभाग ने शुक्रवार देर रात नया लाइसेंस जारी किया। इसके तहत 16 मई तक रूसी तेल से लदे जहाजों के लेनदेन की अनुमति मिल गई है। महज दो दिन पहले ही अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा था कि रूस और ईरान से जुड़े तेल के लिए सामान्य लाइसेंस को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि 11 मार्च से पहले लदे तेल का उपयोग हो चुका है और आगे छूट जारी रखने की कोई योजना नहीं है।

ऐसे में अब अचानक छूट बढ़ाने का फैसला नीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इस नए लाइसेंस में कुछ सख्त शर्तें भी रखी गई हैं। ईरान से जुड़े लेनदेन बाहर होंगे। क्यूबा पर भी रोक और उत्तर कोरिया से कोई डील नहीं है। यानी यह छूट केवल रूसी तेल तक सीमित रहेगी और अन्य प्रतिबंधित देशों पर लागू नहीं होगी।

रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत किरिल दिमित्रीव के मुताबिक, पिछली छूट से करीब 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता है, जो लगभग एक दिन के वैश्विक उत्पादन के बराबर है। हालांकि, इस राहत के बावजूद तेल बाजार में दबाव बना हुआ है। वजह है होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव, जहां से युद्ध से पहले दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का ट्रांजिट होता था।
इसलिए अहम है यह फैसला
अमेरिका का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखना वैश्विक प्राथमिकता बन गया है। एक तरफ प्रतिबंधों की सख्ती है, तो दूसरी ओर सप्लाई बनाए रखने की मजबूरी—इसी संतुलन के बीच यह फैसला लिया गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों को अल्पकालिक राहत जरूर मिलेगी, लेकिन होर्मुज संकट के चलते तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।




































