BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ी भाषा को जनगणना में पृथक पहचान दिलाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़िया समाज और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने सोमवार को जिला कलेक्टर, बिलासपुर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे और अपनी भाषा, संस्कृति तथा अधिकारों के संरक्षण के लिए जोरदार आवाज उठाई।

ज्ञापन के माध्यम से संगठन के जिला संयोजक अनिल कुमार पाली ने आरोप लगाया कि देश की जनगणना प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ी भाषा को लगातार नजरअंदाज करते हुए हिंदी के अंतर्गत शामिल किया जा रहा है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ी भाषियों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि इससे उनकी सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है।

संगठन के युवा अध्यक्ष मनोज कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ी एक समृद्ध और स्वतंत्र भाषा है, जिसका व्यापक उपयोग प्रदेश में होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे अलग पहचान मिलना संवैधानिक अधिकार के अनुरूप है और हर क्षेत्रीय भाषा को संरक्षण मिलना चाहिए।

वहीं, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष शैलु ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि आगामी जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को अलग कोड और स्पष्ट पहचान नहीं दी गई, तो संगठन उग्र जनआंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

ये रहीं प्रमुख मांगें:
-जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को पृथक भाषा के रूप में मान्यता और अलग कोड दिया जाए
-भाषा को संवैधानिक संरक्षण एवं आधिकारिक दर्जा मिले
-सांस्कृतिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक योजनाओं में छत्तीसगढ़ी को प्राथमिकता दी जाए
-भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस नीति बनाई जाए
-कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने “जोहार छत्तीसगढ़, जनगणना म छत्तीसगढ़ी के कॉलम जोडव” जैसे नारों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों से जुड़ा सवाल है, जिसके लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।





































