KOLKATA NEWS. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर जबरदस्त मतदान हुआ, लेकिन इस दौरान हिंसा, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक टकराव ने चुनावी माहौल को पूरी तरह गर्मा दिया। शाम 5 बजे तक 89.99% मतदान दर्ज किया गया, जो लोकतंत्र के उत्साह को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर विवादों ने प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
चुनाव के दौरान कई इलाकों से झड़प, मारपीट और तनाव की खबरें सामने आईं। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी भाजपा (BJP) दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

ममता बनर्जी का हमला: “CRPF कर रही बूथ कैप्चरिंग”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कई जगहों पर केंद्रीय बलों ने बूथों पर कब्जा कर लिया और स्थानीय पुलिस को निष्क्रिय कर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा मतदाताओं, खासकर महिलाओं और बच्चों के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
ममता ने यह भी कहा कि “केंद्रीय बलों का काम सीमा की रक्षा करना है, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल के लिए काम करना।”

TMC का आरोप: मारपीट के बाद बुजुर्ग की मौत
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि हावड़ा जिले के उदयनारायणपुर में केंद्रीय बलों की कथित मारपीट के कारण एक बुजुर्ग की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, बुजुर्ग अपने बेटे के साथ मतदान करने पहुंचे थे, जहां धक्का-मुक्की के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

भाजपा का पलटवार: EVM में गड़बड़ी का आरोप
वहीं भाजपा ने डायमंड हार्बर के फालता क्षेत्र में EVM से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मशीन में भाजपा के चुनाव चिन्ह के सामने बटन पर टेप लगाया गया था, जिससे मतदाता वोट नहीं दे पा रहे थे।
चुनाव आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जहां भी आरोप सही पाए जाएंगे, वहां पुनर्मतदान (Re-polling) कराया जाएगा।

सत्ता की चाबी वाली सीटें
दूसरे चरण की ये 142 सीटें सत्ता के समीकरण में बेहद अहम मानी जा रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव (2021) में इन सीटों में से 123 सीटों पर TMC ने जीत दर्ज की थी, इसलिए इस चरण का परिणाम सरकार की दिशा तय करने में निर्णायक साबित हो सकता है।
पहले चरण में 93% मतदान के बाद दूसरे चरण में भी करीब 90% मतदान ने यह संकेत दे दिया है कि इस बार मतदाता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जो संभावित बदलाव या सत्ता विरोधी रुझान की ओर इशारा कर सकता है।

4 मई को होगा फैसला
अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जब यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथों में जाएगी।



































