BILASPUR NEWS. अभनपुर में ‘काला जादू’ के शक में एक परिवार के साथ हुई बर्बरता ने जितना झकझोरा, उससे कहीं ज्यादा सवाल इस मामले में पुलिस की भूमिका ने खड़े कर दिए हैं। अब छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ भीड़ हिंसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता के तौर पर देखा है।

13 मार्च 2025 को हुई घटना में तिलक साहू, उनके पिता और भाई को भीड़ ने बेरहमी से पीटा, अर्धनग्न कर गांव में घुमाया और रातभर बंधक बनाकर रखा। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पहुंची पुलिस ने न सिर्फ सख्त कार्रवाई नहीं की, बल्कि आरोप है कि पीड़ितों से शिकायत न करने का कागज तक साइन करा लिया।

जब पीड़ित न्याय के लिए अदालत पहुंचे, तब जाकर मामला दर्ज हुआ—वो भी हल्की धाराओं में। कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी ने मामले को और गंभीर बना दिया, जिसके बाद हाई कोर्ट को सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा।

हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
अदालत ने साफ कहा कि यह मामला साधारण नहीं, बल्कि ‘मॉब लिंचिंग’ जैसा गंभीर अपराध है। साथ ही पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए जवाब तलब किया।

अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू
-तत्कालीन थाना प्रभारी और सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच
-दोनों को चार्जशीट जारी
-डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई
-संदेश साफ—लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

हाई कोर्ट ने इस केस को निगरानी में रखते हुए साफ कर दिया है कि कानून के रखवालों की चूक अब नजरअंदाज नहीं होगी।





































