BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में फायर स्टेशनों की भारी कमी और अग्निशमन व्यवस्था में व्याप्त खामियों पर कड़ी चिंता जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई और भविष्य के लिए स्पष्ट ‘एक्शन प्लान’ पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 मई को तय की गई है।

शासन द्वारा कोर्ट में पेश किए गए शपथपत्र के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के केवल 9 जिलों—दुर्ग, नवा रायपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव और कबीरधाम—में ही पूर्ण रूप से फायर स्टेशन संचालित हैं। शेष जिलों में अभी भी होमगार्ड परिसर से अस्थाई रूप से काम चलाया जा रहा है। हालांकि, शासन ने बताया कि बिलासपुर और उरला-सिलतरा में निर्माण कार्य जारी है, जबकि 7 अन्य जिलों (जशपुर, महासमुंद, कोरिया, दंतेवाड़ा, कांकेर, बलौदाबाजार, धमतरी) में टेंडर प्रक्रिया चल रही है।

4 साल बाद भी जमीन की तलाश अधूरी
हैरानी की बात यह है कि बिलासपुर में फायर स्टेशन निर्माण की मंजूरी साल 2020 में ही मिल गई थी, लेकिन जिला प्रशासन पिछले चार वर्षों में इसके लिए उपयुक्त जमीन नहीं खोज पाया है। मोपका सब-स्टेशन में लगी आग के बाद यह मुद्दा फिर गरमाया था। शासन ने कोर्ट को बताया कि शहर के भीतर जमीन न मिलने के कारण रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है। अब सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपयुक्त स्थान पर कम से कम 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएं।

कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट: समन्वय की भारी कमी
हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में अग्निशमन सेवाओं की गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक:
राज्य में फायर सेवाएं एकीकृत कमांड के बजाय नगर निकाय, रेलवे, एनटीपीसी, एसईसीएल और निजी इकाइयों के बीच बंटी हुई हैं।
यूनिफाइड कमांड सिस्टम लागू न होने से आपात स्थिति में विभागों के बीच तालमेल की कमी रहती है, जिससे राहत कार्य में देरी होती है।
छत्तीसगढ़ फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट 2018 लागू होने के बावजूद अब तक बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।

साधनों का टोटा: बस्तर संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित
आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में मात्र 147 फायर फाइटिंग वाहन उपलब्ध हैं। साल 2024-25 में 20 और 2025-26 में 7 नए वाहन खरीदे गए हैं, फिर भी भौगोलिक दृष्टि से बड़े क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर संभाग में संसाधनों की भारी कमी बनी हुई है।

नगर निगम ने झाड़ा पल्ला
सुनवाई के दौरान बिलासपुर नगर निगम ने शपथपत्र देकर स्पष्ट किया कि अब फायर ब्रिगेड से जुड़ी जिम्मेदारी उनकी नहीं है। 2018 के एक्ट के बाद ये सभी जिम्मेदारियां ‘राज्य फायर एंड इमरजेंसी सर्विस विभाग’ को सौंप दी गई हैं। निगम अब केवल समन्वय और जमीन उपलब्ध कराने में सहयोग की भूमिका में है।
कोर्ट ने फायर विभाग के डायरेक्टर को नया शपथपत्र पेश करने को कहा है, जिसमें अब तक की प्रगति और भविष्य की समयसीमा के साथ पूरा एक्शन प्लान मांगा गया है।




































