RAIGARH NEWS. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड दिलाने के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर थाना पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय था और अब तक 44 से अधिक साइबर फ्रॉड मामलों से जुड़ा हुआ है।

इंदिरानगर निवासी आयशा परवीन, जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, इस ठगी का शिकार हुईं। दिसंबर 2025 में उन्हें सीएसआर फंड दिलाने का झांसा दिया गया। आरोपियों ने पहले भरोसा जीतकर उनके संस्थान के दस्तावेज लिए और फिर उनके नाम से बैंक खाता खुलवाया। इसके बाद उन्हें नौकरी और अनुदान प्रक्रिया के नाम पर गुवाहाटी बुलाया गया।

इसके बाद वहां होटल में ठहराकर उनके मोबाइल में एक संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल करवाई गई और बैंक खाते की पूरी पहुंच अपने कब्जे में ले ली गई। गुवाहाटी में आरोपियों ने महिला और उनके पति को लगभग एक सप्ताह तक होटल में रखा। इस दौरान कई बार मोबाइल लेकर खाते की जांच के नाम पर ट्रांजेक्शन किए गए। बाद में तकनीकी समस्या का बहाना बनाकर उन्हें वापस भेज दिया गया।

रायगढ़ लौटने के बाद बैंक से संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलने पर मामले का खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि 29 दिसंबर 2025 से ही खाते में संदिग्ध ट्रांजेक्शन शुरू हो चुके थे। महिला के खाते के जरिए कुल 2 करोड़ 17 लाख रुपए का लेनदेन किया गया था।

टेलीग्राम बना ठगी का नेटवर्क
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी टेलीग्राम के जरिए साइबर फ्रॉड गैंग से जुड़े थे। वे विभिन्न राज्यों में सक्रिय ठगों को कॉर्पोरेट बैंक खाते उपलब्ध कराते थे, जिनका उपयोग ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किया जाता था। इसके बदले आरोपी 5 से 15 प्रतिशत तक कमीशन लेते थे। पूछताछ में आरोपियों ने 25 से 30 बैंक खाते उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने उनके कब्जे से 6 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप जब्त किया है।

देशभर से 44 शिकायतें जुड़ीं
साइबर समन्वय पोर्टल पर जांच के दौरान सामने आया कि पीड़िता के खाते से जुड़े 44 अलग-अलग साइबर फ्रॉड मामलों की शिकायतें देशभर से दर्ज हैं। इन मामलों में करोड़ों रुपए के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सीएसआर फंडिंग, नौकरी या अनुदान के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति या संस्था पर भरोसा न करें। बैंक से जुड़ी जानकारी, OTP, MPIN या मोबाइल एक्सेस किसी के साथ साझा न करें और संदिग्ध एप डाउनलोड करने से बचें।




































