NEW DELHI NEWS. लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर अहम चर्चा हुई। यह बहस सरकार द्वारा नक्सलवाद खत्म करने के लिए तय की गई 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले आयोजित की गई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि रेड कॉरिडोर के 12 राज्यों और आदिवासी समाज की ओर से वह इस चर्चा के लिए आभार व्यक्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय वर्षों से चाहता था कि उनकी स्थिति संसद में उठे और पूरी दुनिया सच्चाई जाने, लेकिन लंबे समय तक उन्हें यह अवसर नहीं मिला। अब उनकी आवाज राष्ट्रीय मंच तक पहुंची है।

कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप
लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद 75 वर्षों में करीब 60 साल तक कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन आदिवासी क्षेत्रों में अपेक्षित विकास नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इतने लंबे समय तक आदिवासी क्षेत्रों में घर, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचाई गईं।

अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कई आदिवासी सांसद वोट के लालच में कांग्रेस के साथ खड़े रहे, लेकिन अपने समाज के विकास के लिए ठोस काम नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी माओवादी हिंसा को देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती माना था, लेकिन उस समय प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

2014 के बाद बदले हालात का दावा
गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिनसे देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा मजबूत हुई। उन्होंने धारा 370 और 35ए को हटाने, राम मंदिर निर्माण, जीएसटी लागू करने और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे फैसलों का उल्लेख किया।

नक्सलवाद मुक्त भारत का सपना साकार होने का दावा
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि अब नक्सलवाद से मुक्त भारत का सपना धीरे-धीरे साकार हो रहा है। उन्होंने इसे सरकार की मजबूत नीतियों और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का परिणाम बताया और कहा कि यह देश के लिए एक बड़ा बदलाव है।




































