TIRANDAJ DESK. मेटावर्स अब नया शब्द नहीं रहा, क्योंकि कुछ समय पहले जब फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी का नाम मेटा किया था उसी समय आपने ये शब्द सुन लिया होगा। फिर आप भूल गए होंगे। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 5जी सेवा की लांचिंग की तो दोबारा यह चर्चा में आया। पीएम ने इस दौरान Web 3.0 चश्मा पहना था, जिसे लगाना ही एक अलग अनुभव देता है। आपको बता दें कि इससे आप मेटावर्स की दुनिया में जा सकते हैं। आप फिर सोच रहे होंगे कि ये भला क्या बला है तो हम आज इसके विषय में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

दरअसल, मेटावर्स एक आधुनिक तकनीक है जिसकी कल्पना किसी वैज्ञानिक ने नहीं बल्कि एक राइटर ने आज से 30 साल पहले वर्ष 1992 में की थी। एक ऐसी आभासी दुनिया जिसमें आप वर्चुअली जाकर अपना समय गुजार सकते हैं, दोस्तों के साथ पार्टी कर सकते हैं। इस तकनीक पर लंबे समय तक काम किया गया और काफी हद तक इसे विकसित भी कर लिया गया है।
मेटावर्स की वर्चुअल दुनिया में आप वर्चुअली ही प्रवेश कर जाएंगे। शब्द का मतलब यह है कि ऐसी वर्चुअल दुनिया जिसमें आप खुद वर्चुअली प्रवेश कर जाते हैं। आपकी ही तरह अन्य भी उसमें प्रवेश करेंगे। फिर आप वे सभी कर पाएंगे जो असली दुनिया में करते हैं। इसकी संभावनाएं भी नई तकनीकों के साथ बढ़ती चली जाएंगी।

वर्क फ्राम होम की दिशा में भी कदम बढ़ाने की तैयारी
वर्चुअल दुनिया और इस तकनीक के बारे में अब तक आपने पढ़ा तो लगा होगा कि यह तो महज एक मनोरंजन का साधन हुआ। तो, ऐसा नहीं है। वैज्ञानिक इस दिशा में भी काम कर रहे हैं कि जैसे कोरोनाकाल में वर्क फ्राम होम किया जा रहा था। यह अब तक की उपलब्ध तकनीकी की मदद से संभव हो रहा था। मेटावर्स की दुनिया में यह कहीं ज्यादा आसान और आमने-सामने बैठकर होने वाले काम, मीटिंग, चर्चा जैसी हो जाएगी।

आभासी दुनिया, हकीकत से भी ज्यादा होगी करीब
जिस समय इंटरनेट जैसी तकनीक आई तो हम दूर के वीडियो, फोटो को देखकर अनुमान लगाते थे कि यह तो हमारे पास में ही होने जैसा है। फिर कालिंग और फिर वीडियो कालिंग ने हम सभी को और करीब ले आया। अब मेटावर्स की दुनिया में ऐसा हो जाएगा कि भले ही हम वर्चुअल ही साथ होंगे लेकिन लगेगा कि असलियत में साथ हैं। कुछ सुविधाएं ऐसी होंगी कि ये असलियत से भी ज्यादा करीबी का एहसास दिलाएगी।

Web 3.0 चश्मा है प्रवेश द्वार
5जी तकनीक के बारे में कहा जा रहा है कि यह 4जी के मुकाबले इंटरनेट स्पीड को कई गुना बढ़ा देगा। लेकिन, बात यही तक सीमित नहीं है। इसमें कई और तकनीकी सुविधाएं भी मिलेंगी। इन्हीं में से एक मेटावर्स में बताई गई कुछ तकनीकी भी शामिल है। प्रधानमंत्री ने जो Web 3.0 चश्मा पहना था, यही वर्चुअल दुनिया का प्रवेश द्वार है। इसे लगाने के बाद हम आभासी दुनिया में पहुंच सकते हैं। अब तक जो तकनीक इस दिशा में विकसित हो चुकी है, हम इसके जरिए उनका आभास कर सकते हैं।







































