BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का कोर्ट रूम गुरुवार को सामान्य दिनों से कुछ अलग नजर आया। न्यायिक कार्यवाही की औपचारिकता के बीच वातावरण में भावनाओं की एक अलग ही अनुभूति थी। अवसर था छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधिपति श्री रमेश सिन्हा के कार्यकाल के पूर्ण होने पर आयोजित Farewell Ovation का।

मुख्य न्यायाधिपति के कोर्ट रूम में आयोजित समारोह में उनके न्यायिक कार्यकाल, नेतृत्व और न्यायिक व्यवस्था में दिए गए योगदान को याद किया गया। इस दौरान सबसे खास बात यह रही कि विदाई समारोह केवल हाईकोर्ट परिसर और कोर्ट रूम तक सीमित नहीं रहा।

कोर्ट रूम में सीमित मौजूदगी, डिजिटल माध्यम से व्यापक पहुंच
समारोह का लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया, जिसके जरिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और प्रदेश के न्यायिक परिवार से जुड़े लोग अलग-अलग स्थानों से इस महत्वपूर्ण अवसर के सहभागी बने।
डिजिटल माध्यम से प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के सभी न्यायाधीशों सहित अनेक लोग समारोह से जुड़े और मुख्य न्यायाधिपति श्री रमेश सिन्हा का संबोधन सीधे सुना। तकनीक के इस उपयोग ने विदाई के पारंपरिक स्वरूप को नया आयाम दिया।
एक ओर बिलासपुर के हाईकोर्ट के कोर्ट रूम में समारोह प्रत्यक्ष रूप से चल रहा था, वहीं दूसरी ओर स्क्रीन के माध्यम से न्यायिक अधिकारी और आम नागरिक भी उसी क्षण इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बने हुए थे।

कार्यकाल में तकनीक और न्याय तक पहुंच पर जोर
मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा के कार्यकाल के दौरान छत्तीसगढ़ की न्यायिक व्यवस्था में तकनीक के उपयोग, न्यायिक अधोसंरचना के विकास, न्याय तक आमजन की पहुंच और प्रशासनिक दक्षता जैसे विषय प्रमुखता से सामने आए।
बदलते समय के अनुरूप न्यायिक संस्थाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के प्रयासों ने यह भी रेखांकित किया कि आधुनिक न्याय व्यवस्था अब केवल पारंपरिक अदालतों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उसे तकनीक और व्यापक जनसरोकारों के साथ भी कदमताल करनी होगी।
3 सितंबर की विदाई बनी यादगार दस्तावेज
03 सितंबर 2026 को आयोजित यह Farewell Ovation केवल एक कार्यकाल के पूर्ण होने का अवसर नहीं रहा, बल्कि एक लंबी न्यायिक यात्रा को स्मरण करने का भावनात्मक क्षण भी बन गया। न्यायिक दायित्व, संस्थागत नेतृत्व और तकनीक के बदलते दौर को एक साथ समेटे इस आयोजन ने कई लोगों को एक साझा अनुभव से जोड़ा।
बिलासपुर के कोर्ट रूम से शुरू हुई यह विदाई लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए दुर्ग समेत अनेक स्थानों तक पहुंची। भावनाओं और तकनीक के इस संगम ने समारोह को एक अलग पहचान दी।

कुछ विदाइयां किसी एक स्थान तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उन सभी लोगों की स्मृतियों में दर्ज हो जाती हैं, जो उस यात्रा के किसी न किसी पड़ाव पर उससे जुड़े रहे होते हैं। शायद यही वजह रही कि मुख्य न्यायाधिपति श्री रमेश सिन्हा की यह विदाई केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की न्यायिक यात्रा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का डिजिटल और भावनात्मक दस्तावेज बन गई।





































