BILASPUR NEWS. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद के एक महत्वपूर्ण मामले में पति की बीमार और बुजुर्ग मां को छोड़कर अलग रहने के लिए दबाव बनाने तथा पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराने को मानसिक क्रूरता करार दिया है। हाईकोर्ट ने पेंड्रारोड की लोअर कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए पति की तलाक याचिका मंजूर कर ली।

जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह से एक नया परिवार बनता है, लेकिन इससे कोई व्यक्ति अपने बुजुर्ग और बीमार माता-पिता के प्रति नैतिक और कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी उचित कारण पति पर अपनी मां से अलग होने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।

छोटी-छोटी बातों पर विवाद का आरोप
मामले के अनुसार, उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी विवेक अग्रवाल का विवाह 12 दिसंबर 2014 को पेंड्रारोड निवासी महिला से हुआ था। दंपति का एक बेटा भी है। पति का आरोप था कि पत्नी अक्सर छोटी-छोटी बातों पर विवाद करती थी और उसकी बुजुर्ग एवं बीमार मां को छोड़कर अलग बड़े मकान में रहने की जिद करती थी।
पति ने बीमार मां को बेसहारा छोड़ने से इनकार कर दिया तो पति-पत्नी के बीच विवाद और गहरा गया। आरोप है कि 11 अगस्त 2019 को पत्नी बिना सहमति गहने और नकदी लेकर पेंड्रारोड स्थित अपने मायके चली गई, जबकि बच्चा इटावा में ही था। पत्नी के ससुराल वापस नहीं लौटने पर पति ने पेंड्रारोड की अदालत में क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की।

लोअर कोर्ट ने खारिज की थी तलाक याचिका
पेंड्रारोड लोअर कोर्ट ने 18 फरवरी 2025 को पति की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि वह पत्नी द्वारा की गई क्रूरता के आरोपों को साबित नहीं कर सका। इसके बाद पति ने इस फैसले को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी।

2019 से अलगाव और मुकदमों से टूटा भरोसा
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने माना कि वर्ष 2019 से दोनों अलग रह रहे हैं। इस दौरान लगातार विवाद और आपराधिक मामलों के कारण पति-पत्नी के बीच आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है।
कोर्ट ने कहा कि बिना किसी जायज वजह के पति को उसकी बीमार और बुजुर्ग मां से अलग होने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। साथ ही, पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराना भी मानसिक पीड़ा और क्रूरता का कारण बनता है। इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए पति की तलाक अर्जी मंजूर कर ली।



































